Air Force

अब विमानों के परीक्षण के लिए ‘ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज’

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चित्रदुर्ग (कर्नाटक)। देश की रक्षाप्रणाली को मजबूत बनाने को लेकर रक्षा मंत्री ने वायुसेना को एक ऐसा टेस्ट रेंज समर्पित किया है जिससे भारतीय वायुसेना को काफी मदद मिलेगी। कर्नाटक के चित्रदुर्ग में DRDO ने ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज तैयार किया। ‘ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज’ बैंगलुरू से करीब 250 किलोमीटर की दूरी पर 4,200 एकड़ में बना है।





रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने डीआरडीओ की मदद से तैयार किए ‘ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज’ भारतीय वायुसेना को समर्पित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने करीब 70 साल से सुरक्षा खतरे का निरंतर सामना किया है और इसलिए उसकी रक्षा तैयारियां हमेशा सर्वोच्च होनी चाहिए। स्वदेश में विकसित मानवरहित एवं मानव संचाचिल विमानों के परीक्षण के लिए यहां पास ही स्थापित देश के पहले ‘ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज’ का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत भौगोलिक रूप से ऐसी जगह स्थित है जो संकट से मुक्त नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘जहां तक भारत की बात है तो हमारा ऐसा पड़ोसी है जो करीब सात दशकों से लगातार सुरक्षा खतरा बना हुआ है और इसलिए हमारी रक्षा तैयारियों का स्तर हमेशा सर्वोच्च होना चाहिए।’

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‘ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज’ का उद्घाटन करते रक्षा मंत्री अरूण जेटली

उन्होंने कहा कि रक्षा तैयारियों का स्तर हमेशा सर्वोच्च रखने के लिए आपको देश में ही निर्माण के लिए केंद्रों को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। जेटली ने कहा कि ऐरोनॉटिकल टेस्ट रेंज देश में अपनी तरह का पहला परीक्षण स्थल है और ऐरोनॉटिकल रक्षा तैयारियों से जुड़ी हर चीज का परीक्षण इस क्षेत्र में होगा। यह क्षेत्र बैंगलुरू से करीब 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चालाकेरे के पास स्थित है।

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