DEFENCE

DRDO को मिसाइल बनाने के लिए मिला 18,000 करोड़ का कॉन्ट्रेक्ट

भारतीय मिसाइल आकाश

नई दिल्ली। मिसाइल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को लगभग 18,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रेक्ट दिया है। रक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए ये कदम उठाया है। इस कॉन्ट्रेक्ट के तहत निर्मित मिसाइलों को चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा। युद्ध की स्थिति में इन मिसाइलों का इस्तेमाल दुश्मन के लड़ाकू विमानों और ड्रोन के खिलाफ किया जाएगा। मिसाइलों के इस ठेके के लिए इजरायल, स्वीडन और रूस 2011 से ही प्रयासरत थे, लेकिन सरकार ने इसके लिए डीआरडीओ को चुना।





रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में लिया फैसला

पिछले हफ्ते रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक हुई थी जिसमें रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने ये फैसला लिया। डीएसी की इस बैठक में जमीन से हवा में मार करने वाली कम रेंज की मिसाइलों का मुद्दा उठाया गया। जहां सरकार को फैसला करना था कि या तो वह विदेशी मिसाइल सिस्टम खरीदे अथवा जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल को प्राथमिकता दे।

आत्मनिर्भर बनाने में ‘आकाश’ है मददगार

गौरतलब है कि आकाश मिसाइल 25 किलोमीटर की दूरी से शत्रु के विमान हेलिकॉप्टर और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम हैं। हाल ही में वायुसेना ने इन मिसाइल को चुना था। देशी हथियारों के निर्माण में डीआरडीओ भले ही पीछे दिखता था लेकिन मिसाइल के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में आकाश काफी मददगार साबित हुई।

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