DEFENCE

भारत का नई कॉम्बैट वेहिकल (FICV) पर फैसला जल्द

बख्तरबंद वाहन

नई दिल्ली। युद्धक्षेत्र में मिकेनाइज्ड दस्तों को आगे ले जाने वाली बख्तरबंद गाड़ियाँ अब बेहद महत्वपूर्ण हो गईं हैं। भारत के पास रूस मूल के एमपीवी-1 और एमपीवी-2 वाहन हैं। भारत ने एमपीवी-2 के अपग्रेड की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है, ताकि ये रात में भी काम कर सकें और नवीनतम एंटी-टैंक मिसाइलों से लैस हो सकें। अब भारत की फ्यूचरिस्टिक इनफेंट्री कॉम्बैट वेहिकल (एफआईसीवी) की 8 अरब डॉलर की परियोजना को भी सरकारी स्वीकृति मिलने वाली है।





3,000-4,000 करोड़ रुपये की आएगी लागत 

रक्षा खरीद परिषद की इस महीने के अंत में होने वाली बैठक में इस सिलसिले में फैसला हो जाएगा। इस सिलसिले में इसके पहले एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी किया था। अब सरकार के पास विकल्प है कि वह इस पत्र को वापस लेकर सामने उपलब्ध पाँच वेंडरों को डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का काम सौंपे या फिर इनमें से दो को चुनकर उन्हें डीपीआर का काम दे। दिक्कत यह है कि पाँचों वेंडरों में सो कोई भी ईओआई की शर्तें पूरी नहीं करता। यह ईओआई रक्षा खरीद नीति-2008 के तहत जारी किया गया था। यह ईओआई रद्द भी किया जा सकता है। इसके तहत दो कंपनियों का चयन होना है, जो एफआईसीवी के प्रोटोटाइप बनाएंगी। इसपर 3,000-4,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस राशि में से 80 प्रतिशत सरकार देगी। प्रोटोटाइप बनने के बाद सेना उनका परीक्षण करेगी

रेस में कई कंपनियां

अब जो कंपनियाँ इस दौड़ में हैं उनके नाम हैं लार्सन एंड टूब्रो, टाटा पावर (स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग डिवीजन), टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत फोर्ज, पिपावाव डिफेंस, रोल्टा इंडिया, पुंज लॉयड, टीटागढ़वैगंस और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी)। प्रोटोटाइप को स्वीकृति मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय द्वारा 2,610 वाहनों का ऑर्डर जारी होने की आशा है। इस वाहन की सर्विस लाइफ 35 साल होगी।

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