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ये ‘सज्जन’ कहानी है पुलिस के जासूस से रक्षामंत्री बनने की

नई दिल्ली/चंडीगढ़: विदेशी धरती में पलकर वहां के पुलिस महकमे में जासूस बनना, फिर वहां की फौज में ऊंचे ओहदे तक पहुंचना। इतना ही नहीं उसी देश का रक्षा मंत्री भी बन जाना। ये किसी इंसान के सोचने के बूते से भी बाहर होगा लेकिन कनाडा का रक्षा मंत्री ऐसा ही एक शख्स है। अब अपनी जन्मस्थली भारत आई इस शख्सियत का नाम है हरजीत सिंह सज्जन।





दिल्ली पहुंचने पर कनाडा के रक्षामंत्री हरजीत सिंह सज्जन को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया

कनाडा के वैन्कूवर से लिबरल पार्टी के सांसद बने हरजीत सिंह सज्जन दो साल पहले रक्षा मंत्री बनने के बाद पहली बार यहां सरकारी दौरे पर आए हैं। पंजाब के होशियारपुर जिले के बम्बेली गांव में 6 सितंबर 1970 को पैदा हुए हरजीत सिंह की जीवन यात्रा संघर्षों और तरह-तरह के अनुभवों से इस कदर भरी है मानो कोई फिल्मी किरदार हो।

फौज की वर्दी में अपने परिवार के साथ हरजीत सिंह सज्जन

पिता कुंदन सिंह सज्जन पंजाब पुलिस में हवलदार थे लेकिन विदेश बसने की चाह उन्हें ब्रिटिश कोलम्बिया ले गई, तब हरजीत की उम्र चार साल थी। बड़ी बहन और मां के साथ वह गांव में ही रहे। उधर पिता ने ब्रिटिश कोलम्बिया में एक मिल में काम शुरू किया जहां लकड़ी की चिराई होती थी। दो साल बाद हरजीत और परिवार के बाकी सदस्य भी कनाडा चले। मां खेतों में काम करती थी।

लेफ्टी. कर्नल हरजीत सिंह सज्जन के दादा लम्बरदार फकीर सिंह (बाएँ) और पिता सरदार कुंदन सिंह सज्जन

किशोरावस्था में उन्हें अमृत छकाया गया ताकि बुरी संगत से दूर रखा जा सके। वैन्कूवर में पढ़ाई लिखाई करने के बाद उन्होंने पुलिस महकमे में नौकरी की। इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान में खासतौर से काम किया। अपराधी गिरोहों की जासूसी करने और अपराधियों को जेल पहुंचाने में उन्हें महारत हासिल हो गई। इस बीच, हरजीत सिंह को नाटो के शांति अभियान के तहत बोस्निया में भी तैनात किया गया।

2010 में जब वह आखिरी बार अफगानिस्तान गए तो अमेरिकी फौज के लेफ्टिनेंट जनरल जेम्स टेरी ने उन्हें दसवीं माउंटेन डिवीजन में सलाहकार के तौर पर शामिल होने की सलाह दी। सज्जन ने सलाह मानी और वैन्कूवर पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

वहीं भारत में उनकी छवि खालिस्तानी विचारधारा वाले कट्टरपंथियों के समर्थक के तौर पर भी बनाई गई जिसे लेकर विवाद अब फिर खड़ा हुआ जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उनसे मुलाकात न करने की बात कही।
अमृतसर पहुंचने पर हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए उसी अकाली दल (अमृतसर) के कार्यकर्ता जुटे थे जिनके नेता सिमरनजीत सिंह मान हैं।

उनके स्वागत के लिए उसी अकाली दल (अमृतसर) के कार्यकर्ता जुटे थे जिनके नेता सिमरनजीत सिंह मान हैं

भारत की राजनीति से उनका पाला पहले इस तरह से नहीं पड़ा। हालांकि, वह कह चुके हैं कि यहां स्थानीय सियासत पर नहीं बोलेंगे। लेकिन कनाडा की राजनीति पर उनकी पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2015 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद ही रक्षामंत्री जैसा ऊंचा ओहदा और जिम्मेदारी दे दी गई। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी कंजर्वेटिव पार्टी (Conservetive Party) के उम्मीदवार को 50 फीसदी वोटों से मात दी।

राजनीति में आने से पहले हरजीत सिंह सज्जन लेफ्टिनेंट कर्नल थे

राजनीति में जाने से पहले तक वह फौज में लेफ्टिनेंट कर्नल थे। पुलिस और फौजी जीवन का अनुभव उनके लिए सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ अभियान में मददगार बना। हरजीत सिंह कनाडा की किसी सैनिक रेजीमेंट की कमान संभालने वाले पहले सिख भी हैं।

फौजी सेवा के दौरान मिशन पर जाते हरजीत सिंह सज्जन

दिलचस्प है कि जब दाढ़ी के होते हुए गैस मास्क पहनने में मुश्किल हुई तो उन्होंने ऐसे खास अभियान के लिए ऐसा गैस मास्क ईजाद किया जो इस मुश्किल को पार कर सके। इसे उन्होंने पेटेंट भी करवा लिया।

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