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घाटी में पहुंचे 1 लाख प्लास्टिक बुलेट्स, मिर्चवाले पावा शैल्स

PAVA बम

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में उपद्रवियों से निपटने के लिए केंद्र ने सुरक्षा बलों को करीब एक लाख प्लास्टिक बुलेट्स भेजी हैं। इनके साथ-साथ केंद्र ने घाटी में सुरक्षा बलों को पावा (pelargonic acid vanillylamide) शैल्स भी सप्लाई किए हैं। सुरक्षाबलों को आदेश भी दिया गया है कि वो भीड़ को काबू में करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल न करें।





सुरक्षा बलों के पास आखिरी विकल्प बचता है पैलेट गन

ऐसा पहली बार होगा कि कश्मीर में पत्थरबाजों और उपद्रवियों को काबू में करने के लिए सुरक्षा बल प्लास्टिक बुलेट्स और पावा शैल्स का इस्तेमाल करेंगे। यही नहीं, गृह मंत्रालय की ओर से सुरक्षाबलों को आदेश दिया गया है कि अब पैलेट गन का इस्तेमाल आखिरी विकल्प के तौर पर प्करें, यानि जब सुरक्षाबलों को लगे कि अब हालात बहुत ज्यादा बिगड़ गए हैं, तभी पैलेट गन को उठाएं, प्लास्टिक बुलेट्स और पावा शैल्स ज्यादा असरकारी हैं।

पैलेट गन धातु के छोटे-छोटे छर्रे होते हैं, जो शरीर में चुभ जाते हैं। इसकी मार से लोग को अक्सर फेशियल इंजरी होती है और लोग अंधे भी हो जाते हैं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय पावा शैल्स को पैलेट गन के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करेगा।

पत्थरबाज

कश्मीर में पत्थरबाज आए दिन सुरक्षाकर्मियों पर हमला करते हैं (फाइल फोटो)

याचिका सुनवाई के समय केंद्र ने दिए थे संकेत

बता दें, पिछले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली मांग की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वो उग्र प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए जल्द ही एक सीक्रेट हथियार का इस्तेमाल शुरू करने जा रही है। इसे पैलेट गन के पहले इस्तेमाल में लाया जाएगा। केंद्र सरकार के मुताबिक बदबूदार पानी, लेज़र डेज़लर और तेज़ आवाज करने वाली मशीनों का भी प्रदर्शनकारियों पर कोई असर नहीं होता है, तब आखिरी विकल्प के तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है।

प्लास्टिक बुलेट

प्लास्टिक बुलेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुप्रीम कोर्ट में गृह मंत्रालय ने रखा था ये तर्क

साथ ही केंद्र सरकार ने कोर्ट के समक्ष कहा था कि जम्मू-कश्मीर में होने वाले प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शन जैसे नहीं होते हैं। घाटी में प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड, पेट्रोल बम, मॉकटेल बम से भीड़ में छुपकर पीछे से ग्रेनेड फेंकते हैं।

गौरतलब है कि पैलेट गन को लेकर याचिककर्ता ने कोर्ट में कहा था कि कोई सरकार अपने लोगों को मारने, अंधा या अपाहिज करने की इजाजत नहीं दे सकती है। आखिर सरकार इसकी इजाजत कैसे दे सकती है, जिसके बाद कोर्ट ने याचिककर्ता से दो हफ़्ते के अंदर हलफनामे के जरिए वो सुझाव मांगे हैं, जिनके जरिए इस हालात पर काबू पाया जा सकता है।

यहां निर्मित किए गए हैं पावा

पावा शैल्स को साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के तहत लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (IITR) ने विकसित किया था। अधिकारियों के अनुसार पावा शैल्स IITR में एक साल से भी ज्यादा समय से ट्रायल में हैं। यह प्राकृतिक काली मिर्च में पाया जाने वाला कार्बनिक यौगिक है। इसका इस्तेमाल सामने वाले व्यक्ति के शरीर में जलन पैदा कर देता है और वह कुछ न कर पाने की हालत में पहुंच जाता है।

हालांकि, इन गोलों से ज्यादा हानि नहीं पहुंचती। इसके अतिरिक्त बीएसएफ के टीएसयू द्वारा बनाया गया ‘स्टन ग्रेनेड’ भी एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। यह टारगेट को बेहोश कर देता है और कुछ मिनट के लिए अंधा कर देता है।

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