DEFENCE

ब्रह्मोस ने रचा इतिहास, इसलिए बनी दुनिया की पहली मिसाइल

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने इतिहास रच दिया

नई दिल्ली। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का आज ओडिशा तट से सफल परीक्षण किया गया। एक महीने में इस मिसाइल का ये तीसरा परीक्षण है और यह बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली को स्थापित करने के लिए किया गया है।





स्वदेश में विकसित सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल लांच किए जाने के सप्ताह भर बाद ही यह परीक्षण किया गया। डीआरडीओ के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर मिश्रा के मुताबिक़ ‘आज के परीक्षण में मिसाइल की दूरी बढ़ाई गई थी और इसका निशाना सटीक रहा।’ इतनी दूरी तक सटीक निशाना लगाने वाली यह दुनिया की पहली मिसाइल है। रूस के सहयोग से विकसित की गई ब्रह्मोस ने 450 किमी का फासला तय किया।

दूसरी तरफ ब्रह्मोस का एक और संस्करण विकसित किया जा रहा है, जिसकी रेंज 800 किमी होगी। लेकिन इसके परीक्षण के लिए हमें ढ़ाई साल तक इंतज़ार करना पड़ सकता है।

भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मास्क्वा नदी के नाम को जोड़कर ब्रह्मोस नाम का यह मिसाइल कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसका पहला परीक्षण 12 जून 2001 को किया गया था।

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