DEFENCE

कई उपलब्धियों के लिए जाने जाएंगे मनोहर पर्रिकर

मनोहर-पर्रिकर

कैबिनेट में रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाल चुके मनोहर पर्रिकर अब फिर गोवा की राजनीति में लौट गए हैं। सादगीपूर्ण जीवनशैली, साफ छवि के लिए जाने जाने वाले पर्रिकर ने रक्षा मंत्रालय में आने के बाद कई बड़े फैसले लिए। इस मौके पर जानिए पर्रिकर के रक्षा मंत्री के तौर पर बड़ी उपलब्धियों के बारे में-





सर्जिकल स्ट्राइक के ऑपरेशन पर पूरी रात रखी नजर:

आपको याद दिला दें कि उरी में हुए आतंकी हमले में जवानों की शहादत का बदला अक्टूबर 2016 में भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों को ढेर करके लिया था। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भारतीय सेना के जाबांजों ने पाकिस्तान कई आतंकी कैंप ध्वस्त किए थे। सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त पूरी रात देश के रक्षा मंत्री ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए थे।

म्यांमार में सफल सर्जिकल स्ट्राइक

सेना मणिपुर में आतंकियों के खिलाफ पीछे साल के मई महीने म्यांमार सरहद पर खुफिया रिपोर्ट के बाद एक सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन पर मनोहर पर्रिकर की पैनी नजर थी और उन्हीं की निगरानी में इस अंतिम रूप दिया गया। इसके लिए पर्रिकर ने खुद उस वक्त के आर्मी प्रमुख को जमीनी हालात लेने के लिए भेजा था। सेना के लोकल कमांडरों को आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन करने की योजना को अंतिम रूप दिया। यहां पर आतंकियों के सेना के काफिले पर हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद भारतीय सेना ने सीमा के अंदर घुसकर उग्रवादियों को मार गिराया था।

राफेल फाइटर प्लेन सौदे को हरी झंडी

लंबे वक्त से लटके राफेल फाइटर प्लेन के सौदे को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अगुवाई में हरी झंडी मिली। सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर प्लेन के सौदे पर हस्ताक्षर हुए। भारत दौरे पर आए फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। फ्रांस से भारत 36 राफेल विमान खरीदेगा।

यह सौदा 7.8 बिलियन यूरो में तय हुआ। अगर भारतीय रुपये में बात करें तो करीब 59 हजार करोड़ में आएगा। एक राफेल की कीमत हथियार के सहित करीब 1,600 करोड़ रुपये की पड़ेगी। चीन की चुनौती से निपटने के लिए मनोहर पर्रिकर ने इस सौदे पर अपनी पूरी ताकत झौंक दी थी। फ्रांस ने इस डील को मनोहर पर्रिकर की एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखी जाती है, क्योंकि पिछले दिनों रक्षा सौदों को लेकर तमाम तरह के विवाद सामने आए थे।

वन रैंक वन पेंशन लागू

सैनिकों की 40 साल पुरानी ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को अमल के रास्ते पर ले जाने में उनकी बड़ी भूमिका देखी गई। पूर्व सैनिकों के साथ-साथ विपक्ष वन रैंक वन पेंशन को लेकर केंद्र को घेरने की कोशिश की, लेकिन पर्रिकर ने इस मुद्दे को वक्त के साथ सुलझा लिया। OROP को सुलझाना मनोहर पर्रिकर की एक बड़ी उपलब्धि है। इसे लागू करने में तमाम अड़चनें आईं लेकिन उन्होंने पूर्व सैनिकों से किए वादे को बेहद सरल तरीके से पूरा कर दिया।

पाकिस्तान को करारा जवाब

नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी की घटनाएं नई नहीं हैं लेकिन इस बार पाक को इस तरह के दुस्साहस का करारा जवाब मिला। पाकिस्तान की ओर से जब भी फायरिंग हुई भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई में उसे वैसा ही जवाब मिला।

Comments

Most Popular

To Top