DEFENCE

देश की सुरक्षा में ISRO की भूमिका से जुड़ी 9 रोचक बातें

भारतीय सेना के जवानों ने पिछले वर्ष सीमा पार कर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उस सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वैसे भी ISRO को अन्तरिक्ष में भारत की आंख कहा जाता है। आज हम आपको बता रहे हैं ‘इसरो’ से जुड़ी कुछ खास बातें :





INCOSPAR था ‘इसरो’ का नाम

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन को संक्षेप में ‘ISRO’ कहा जाता है 15अगस्त 1969 को इसकी स्थापना हुई। इससे पहले इसका नाम इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (INCOSPAR)था और इसकी स्थापना वर्ष 1962प्रधानमंत्री नेहरु ने की थी। ISRO का मुख्यालय बेंगलुरु में है और वर्तमान में इसके चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार हैं।

मुम्बई हमले के बाद सुरक्षा पर शुरू किया काम

‘मानवजाति की सेवा में अन्तरिक्ष प्रौद्योगिकी’ के अपने आदर्श वाक्य का अनुसरण करने वाले ISRO ने भारत के लिए सुरक्षा दृष्टि से उपग्रह निर्माण शुरू किया। वर्ष 2008 के मुम्बई हमले के बाद सैटेलाईट रिसेट-2 बनाया। इसके निर्माण में इजरायल से प्राप्त तकनीक का प्रयोग किया गया था।

सेना को मिली बेहतर संचार सुविधा

 

भारत ने 2009 में प्रक्षेपित रडार इमेजिंग सैटेलाईट रिसेट-2 को लांच किया जो सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया। यह सैटेलाईट किसी भी मौसम में सेना को टारगेट एरिया की रडार इमेज प्रदान करने में सक्षम है।

सामरिक उद्देश्य से भी किया सैटेलाईट का निर्माण

पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के अलावा ISRO ने सामरिक उद्देश्य से भी संचार उपग्रहों का निर्माण किया। वर्ष 2015 में ISRO द्वारा लांच किया गया जीसेट-6 इसका उदहारण है। इसमें छ: मीटर व्यास वाला एक एंटीना है जो सेना को आधुनिक संचार की सुविधा प्रदान करता है।

भारतीय नौसेना को भी समर्पित किया एक उपग्रह

न केवल भारतीय सेना को बल्कि इसरो ने भारतीय नौसेना को भी एक सैटेलाईट समर्पित किया है। वर्ष 2003 में संचार उपग्रह जीसेट-7 लांच किया। ये नौसेना को आधुनिक संचार सुविधाएं देकर और अधिक मजबूत बनाता है। इस सैटेलाइट की मदद से नौसेना दुश्मनों पर पैनी नजर रख सकेगी जिसमें युद्धपोतों, पनडुब्बियों, विमानों से सही समय पर संपर्क साध सकेगी।

GSLV Mk-III X/CARE सबसे भारी रॉकेट

दिसंबर, 2014 में ISRO ने अपने सबसे भारी रॉकेट में से एक जीएसएलवी एमके-3 का परीक्षण किया। 630 टन वजनी और 4 टन वजन ले जाने में सक्षम यह अपने साथ भारत में बने मानव रहित चालक दल के कैप्सूल को भी ले गया। भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परीक्षण था।

अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम कर चुका है स्थापित

भारत ने अपना खुद का जीपीएस सिस्टम स्थापित करने के लिए अप्रैल, 2016 में सफलतापूर्वक अपने GPS Satellite NAVIC (Navigation with Indian Constellation) को लांच किया है। यह भारत के अलावा आस-पास की 1500 स्कवायर किलोमीटर की रेंज में भी काम करता है। इसकी मदद से मौसम, विमानन और विभिन्न क्षेत्रों में अधिक सटीकता से जानकारी मिल पाएगी। अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम स्थापित करने वाला भारत विश्व का पांचवा देश है।

एक ही राकेट से लांच किए 20 सैटेलाइट्स

जून 2016 में इसरो ने एक ही राकेट से 20 सैटेलाइट्स लांच करके एक नया कीर्तिमान बनाया। इस मिशन में PSLV प्रक्षेपण यान द्वारा कुल 1288 किलोग्राम वजन के 20 विभिन्न सैटेलाइट्स को लांच किया गया।

 Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV-C37) बना चुका है वर्ल्ड रिकॉर्ड

ISRO ने 15 फ़रवरी 2017 को PSLV-C37 द्वारा एक साथ 104 सैटेलाइट्स पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करके एक सबसे अधिक सैटेलाइट्स लांच करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। यही नहीं, भारत के पास विश्व स्तरीय ऑप्टिकल इमेजिंग सैटेलाईटस की श्रृंखला है।

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