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ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक विस्फोटक..

तो ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक विस्फोटक

विस्फोटक (Explosives) कुछ यौगिक या मिश्रण ऐसे होते हैं, जिनमें आग लगाने या अघात करने पर बड़े धमाके के साथ वे विस्फोटक होते हैं। इनके छोटे कणों में बड़ी मात्र में ऊर्जा समाहित होती है। इन पदार्थों से जब ये उर्जा अचानक रिलीज होती है, तो ये विस्फोट के रूप में बाहर आती है। एक विस्फोटक सामग्री में संग्रहीत संभावित ऊर्जा में तीन चीजें शामिल हो सकती हैं। पहली रासायनिक ऊर्जा जैसे नाइट्रोग्लिसरीन, प्रकाश संश्लेषण, दूसरी कम्प्रेस एयर जैसे गैस सिलेंडर, नाइट्रस ऑक्साइड और तीसरी  यूरेनियम-235, प्लूटोनियम-239 जैसी परमाणु ऊर्जा आदि। आज विभिन्न देशों में बहुत बड़ी मात्रा में विस्फोटकों का निर्माण होता है। आइये जानते हैं कि आखिर दुनिया में ऐसे कौन से विस्फोटक हैं, जो बेहद खतरनाक हैं।





ब्लैक पाउडर- जिसे ‘गन पाउडर’ भी कहा जाता है

ब्लैक पाउडर

ब्लैक पाउडर या गन पाउडर

ब्लैक पाउडर एक रासायनिक विस्फोटक है। यह विभिन्न रासायनिक तत्वों का एक मिश्रण है जैसे सल्फर, पोटेशियम, चारकोल और नाइट्रेट। ब्लैक पाउडर को गन पाउडर भी कहा जाता है। ब्लैक पाउडर कम शक्तिशाली विस्फोटक श्रेणी में आता है, क्योंकि यह विस्फोट की बजाय डिफ्लैगेट है। इसे मुख्य रूप से खनन, पटाखों और आतिशबाजी में उपयोग किया जाता है।

टीएनटी (TNT-Tri Nitro Toluene) C7H5N3O6

टीएनटी (TNT-Trinitrotoluene)

टीएनटी (TNT-Trinitrotoluene)

टीएनटी एक प्रसिद्ध और उपयोगी विस्फोटक सामग्री है, औद्योगिक उद्देश्यों और सैन्य उपयोग में टीएनटी सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला विस्फोट पदार्थ है, यह पानी में भी प्रभावी है। अंडरग्राउंड बमबारी के लिए यह सबसे अच्छा माना जाता है। तीव्र विस्फोटक, युद्ध के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे प्लास्टिक विस्फोटक के नाम से भी जाना जाता है।

पीईटीएन (Penta Erythritol Tetranitrate) C5H8N4O12

पीईटीएन

पीईटीएन (pentaerythritol tetranitrate)

PETN दुनिया में सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु विस्फोटक सामग्री है, जिसकी प्रभाविक क्षमता 1.66 है। इसे टेन कोर्पेंट पेन्थ्रैइट या नाईट्रोपेंट भी कहा जाता है और इसकी संरचना नाइट्रोग्लिसरीन के समान है। PETN विस्फोटक का इस्तेमाल 7 सितंबर, 2011 को दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर हुए धमाके में किया गया था। ये चीनी की तरह सफेद होता है। यह जल्दी से पकड़ में नहीं आता, इसलिए आतंकी इसे ज्यादातर इस्तेमाल करते हैं। इसकी 50-100 ग्राम मात्र एक कार को उड़ाने की क्षमता रखती है। द्वीतीय विश्व युद्ध के दौरान  PENT का प्रयोग किया गया था।

यूरेनियम -235 (Uranium-235, 235U)

यूरेनियम -235

यूरेनियम -235

यूरेनियम-235 को पहली बार 1935 में आर्थर जेफरी डिमप्स्टर ने खोजा था। इसमें 143 न्यूट्रॉन और 92 प्रोटॉन शामिल हैं। U-235 का आधा जीवन 702,800,000 साल है। यह प्राकृतिक यूरेनियम का 0.72% समस्थानिक और यह एकमात्र समस्थानिक है, जो एक मौलिक न्यूक्लाइड है। यूरेनियम -235 का गलनांक 1,132 डिग्री सेल्सियस है। 6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा में गिराए गए बम बहुत अधिक तापमान वाले और अधिक समृद्ध यूरेनियम से ही बने थे। इस बम का नाम ‘लिटिल ब्वाय’ है।

 प्लूटोनियम-239 (Plutonium-239, 239Pu)

प्लूटोनियम-239

प्लूटोनियम-239

प्लूटोनियम -239 दुनिया में सबसे शक्तिशाली विस्फोटक पदार्थ है, क्योंकि युरेनियम-235 की तुलना में इसकी विखंडन क्षमता अधिक है। प्लूटोनियम का आविष्कार परमाणु बम तैयार करने के समय1940 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में हुआ था। प्लूटोनियम-239 परमाणु हथियारों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में प्रयुक्त प्राथमिक विखंडनीय प्लूटोनियम समस्थानिक है। 24,100 वर्ष इसका आधा जीवन है।

प्लूटोनियम -239 में 145 न्यूट्रॉन और 94 प्रोटॉन होते हैं। रेडियोधर्मिता के गुण के कारण प्लूटोनियम के समस्थानिक और यौगिक विषैले होते हैं। परमाणु ऊर्जा में प्लूटोनियम-239 काम आता है।1945 में नागासाकी, जापान में गिराए गए परमाणु बम में प्लूटोनियम -239 की उच्च मात्रा शामिल थी। प्लूटोनियम एक सिल्वरी-ग्रे धातु है, जो हवा में विस्फोट होने पर अपने रंग को पीले रंग में बदलता है। प्लूटोनियम -239 सूक्ष्म कणों का कण का उत्सर्जन करता है और रेडियो एक्टिव रिएक्शन होने पर यूरेनियम-235 हो जाता है इससे बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है।

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