Army

मौत से लड़कर हासिल होती है ‘मैरून बैरेट’ और फिर जवान कहलाते हैं ‘Red Devils’, जानें 10 खास बातें

‘मैरून बैरेट’ (मैरून गोल टोपी) इनकी पहचान है। इन्हें मौत से डर नहीं लगता। दुश्मन इन्हें ‘लाल दैत्य’ कहते हैं और इनके नाम से ही खौफ खाते हैं। असंभव को संभव बनाना इनकी आदत में शुमार है। जी हां, ये हैं भारतीय सेना के पैरा कमांडो। शायद बहुत ही कम लोग ये जानते होंगे कि भारतीय सेना के पैरा कमांडो को कितने कठिन दौर से गुजरना पड़ता है। अपने आदर्श वाक्य ‘बलिदान’ को अपने कंधे पर सजाकर चलने वाली ये  ‘पैरा स्पेशल फोर्स’ विकट परिस्थितियों में भी अपने मिशन को अंजाम देने में सक्षम हैं। आइये आपको बताते हैं कि आखिर कैसे तैयार किए जाते हैं ये जाबांज :





ऐसे होता है ‘पैरा कमांडो’ का चयन

सेना की विभिन्न रेजिमेंट्स में से पैरा स्पेशल फोर्स में शामिल होने के लिए चयन किया जाता है। इसमें सभी रेजिमेंट्स व रैंकों से जवान चुने जाते हैं। तकरीबन दस हजार सैनिकों में से एक को ‘पैरा कमांडो फोर्स’ के लिए एच्छिक आवेदन के आधार पर चुना जाता है।

Comments

Most Popular

To Top