Air Force

बेमिसाल ‘डकोटा विमान’ जल्द वायुसेना में होगा शामिल

नई दिल्ली। 1940 के दौरान ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ में शामिल किया गया डगलस डीसी-3 यानी डकोटा विमान अब नए रूप में भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनने जा रहा है। इस विमान ने 17 अप्रैल को ब्रिटेन से अपनी यात्रा शुरू की।  यह 25 अप्रैल को जामनगर पहुंचेगा और चार मई को गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना अड्डे पर इसे शामिल किया जाएगा। आपको बता दें कि कश्मीर का पुंछ यदि आज भारत का हिस्सा है तो इसका बड़ा श्रेय डकोटा विमान को जाता है। जिसने 1947 के भारत पाक युद्ध में सैनिकों को शीघ्रता से कश्मीर की धरती पर पहुंचाया था।





‘परशुराम’ होगा विमान का नया नाम

राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर के प्रयासों से कबाड़ में पहुंच चुके इस विमान को ब्रिटेन में फिर से तैयार किया गया है और अब यह फिर से वायुसेना की सेवा करेगा। राजीव चंद्रशेखर ने विमान से जुड़े दस्तावेज वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ को सौंपे दिए हैं। विमान को नया नाम ‘परशुराम’ दिया गया है। इसके अलावा इसे वीपी-9005 के नाम से भी जाना जाएगा।

फिलहाल यह विमान ब्रिटेन से उड़ान भर चुका है और भारत में इसकी पहली लैंडिंग जामनगर हवाई अड्डे पर होगी। जहां से यह मई माह में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित ‘हिंडन एयरबेस’ में एक खास समारोह के साथ शामिल हो जाएगा। विमान को कई देशों के ऊपर से गुजरना था इसके लिए विभिन्न देशों से अनुमति हासिल की गई थी। इसे भारतीय वायुसेना और रीफ्लाइट एयरव‌र्क्स लिमिटेड की संयुक्त टीम भारत ला रहे हैं।

डकोटा डीसी-3 का एक बेड़ा वर्ष 1988 तक वायुसेना की सेवा में रहा। अपने समय का यह अत्यंत बहुपयोगी परिवहन विमान था। इस विमान को 2011 में स्क्रैप से हासिल किया गया और वायुसेना को उपहार में देने के लिए चंद्रशेखर द्वारा ब्रिटेन में इसे उड़ान भरने के लायक बनाया गया। चीफ ऑफ एयर स्टाफ ने इसी वर्ष 13 फरवरी को चंद्रशेखर से यह विमान वायुसेना के लिए स्वीकार किया। वायुसेना ने रीफ्लाइट एयरव‌र्क्स लिमिटेड लंदन के साथ एक करार किया है।

डकोटा परशुराम की खूबियों की बात करें तो वर्ष 1930 में रॉयल इंडियन एयर फ़ोर्स के 12 वें दस्ते में पहली बार शामिल किये गए इस विमान ने वर्ष 1947 के भारत-पाक युद्ध में कश्मीर को बचाने में इस विमान ने अहम् भूमिका निभाई थी। इस युद्ध के दौरान सेना की 1 सिख रेजिमेंट के जवानों को शीघ्रता से कश्मीर पहुंचाया था।जिसके बाद सेना कश्मीर के पुंछ को पाकिस्तान के हाथों में जाने से बचा पाई थी। बांग्लादेश मुक्ति में भी इस विमान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। गौरतलब है कि वायुसेना के पास मौजूद विशिष्ट विमानों में यह पहला डकोटा विमान होगा जो सैन्य मिशन में ख़ास महत्त्व रखता है।

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