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शहीद होने के बाद पैदा हुई बेटी ने लिख डाली पिता की शौर्य गाथा

पिता मेजर पद्मपाणि आचार्य पर बेटी ने लिखी किताब
पिता मेजर पद्मपाणि आचार्य पर बेटी अपराजिता ने लिखी किताब (सौजन्य- गूगल)

हैदराबाद। उसने अपने पिता को सिर्फ फोटो में देखा। अपने पिता की बहादुरी के किस्से भी उसने या तो दूसरों से सुने या फिर किताबों में पढ़े। अब उसी ने अपने पिता के पराक्रम और अदम्य साहस को श्रद्धांजलि देने के लिए किताब ही लिख डाली। किताब लिखने वाली हैं 19 वर्षीय अपराजिता और किताब जिनके बारे में है वे हैं उनके पिता मेजर पद्मपाणि आचार्य। दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देते हुए मेजर पद्मपाणि आचार्य करगिल में शहीद हो गए थे। युद्धभूमि में अदम्य साहस दिखाने के लिए मेजर पद्मपाणि आचार्य को वीरता के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मेजर पद्मपाणि के शहीद होने के तीन माह बाद अपराजिता का जन्म हुआ था।





मेजर पद्मपाणि की बेटी अपराजिता कहती हैं, ‘मैंने अपने पिता को नहीं देखा लेकिन मुझे उन पर गर्व है। उन्होंने देश को सबसे पहले माना और देश की रक्षा की खातिर अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।’

इस किताब में अपराजिता ने अपने पिता के सैन्य जीवन के बारे में बताया है। पिता द्वारा घर भेजे गए पत्र, तस्वीरें और और उनकी जिंदगी के किस्से किताब का आधार बने।

मेजर पद्मपाणि आचार्य राजपूताना राइफल्स में थे। करगिल युद्ध में उन्होंने अपनी कंपनी की अगुवाई की थी। दुश्मन से लड़ते हुए वह 28 जून 1999 को शहीद हो गए थे।

पुस्तक विमोचन के समय तेलंगाना सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एन. श्रीनिवास राव भी उपस्थित थे। करगिल युद्ध में मेजर जनरल राव भी मेजर आचार्य के साथ थे। मेजर आचार्य के बारे में उन्होंने कहा, ‘मेजर आचार्य सिर्फ सैनिकों ही नहीं देश के भी रोल मॉडल हैं।’

किताब की लॉन्चिंग के वक्त तेलंगाना सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एन. श्रीनिवास राव भी मौजूद रहे। मेजर राव ने भी उस जंग में मेजर आचार्य के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बटैलियन की अगुवाई की थी। उन्होंने कहा, ‘मेजर आचार्य केवल सैनिकों के लिए ही नहीं, बल्कि देश के भी रोल मॉडल हैं।’

करगिल युद्ध पर निर्मित जेपी दत्ता की फिल्म ‘एलओसीः करगिल’ में मेजर पद्मपाणि आचार्य का किरदार अभिनेता नागार्जुन ने निभाया था।

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