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बोफोर्स का भूत उतरा, मोदी जाएंगे स्वीडन

बोफोर्स तोप
बोफोर्स तोप (सौजन्य- गुगल)

नई दिल्ली। भारतीय थलसेना के लिए बोफोर्स  तोपों के सौदे की दलाली का भूत भारत पर इस कदर सवार रहा कि 1988 के बाद से भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने स्वीडन का दौरा नहीं किया और इसकी वजह से दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों पर भी आंच आई। लेकिन अब 28 सालों बाद स्वीडन से रिश्तों को पटरी पर लाने के इऱादे से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वीडन का दौरा करने वाले  हैं।





प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 अप्रैल को स्वीडन के दौरे पर जाएंगे जहां वह स्वीडन के प्रधानमंत्री के साथ आपसी रिश्तों को व्यापार से लेकर रक्षा तक के क्षेत्रों में गहरा बनाने के लिये बातचीत करेंगे। उल्लेखनीय है कि स्वीडन की बोफोर्स कम्पनी से तोप खरीदने में रिश्वतखोरी का आरोप पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर लगा था औऱ उसके बाद की सरकारें इस सौदे में रिश्वतखोरों के नाम उजागर करने के चक्कर में उलझी रहीं।

लेकिन अब भारत और स्वीडन फिर से रक्षा रिश्ते गहरे करने की कोशिश में जुटे हैं।स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में प्रधानमंत्री मोदी स्वीडेन के प्रधानमंत्री के साथ वहां के 20 अग्रणी उद्योगतियों के साथ सीईओ- बैठक करेंगे जिसमें स्वीडन की अग्रणी रक्षा कम्पनी साब के सीईओ भी मौजूद रहेंगे। उल्लेखनीय है कि साब कम्पनी ग्रिपेन लड़ाकू विमान बनाती है औऱ वह इसे भारतीय वायुसेना को बेचना चाहती है। साब कम्पनी वायुसेना द्वारा जारी 110 विमानों के टेंडर में भी फिर से भाग लेने को उत्सुक है।

स्टाकहोम में स्वीडन के साथ दिवपक्षीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री इंडिया-नार्डिक शिखर बैठक में भी भाग लेंगे। यह शिखर बैठक  स्वीडन के साथ मिलकर आयोजित की गई है जिसमें नार्डिक इलाके के पांच देश- डेनमार्क, नार्वे, आइसलैंड, फिनलैंड और स्वीडन के राष्ट्रप्रमुख भाग लेंगे। नार्डिक देशों के साथ इस तरह की शिखर बैठक अब तक केवल अमेरिका ने आयोजित की है औऱ इसके बाद भारत ने इसकी पहल की है। इस तरह भारत नार्डिक देशों के साथ अपना तालमेल बढ़ाएगा और उनके साथ व्यापार औऱ तकनीक के रिश्ते गहरे करेगा। इन देशों के साथ भारत के सामरिक रिश्तों को मजबूती देने के इरादे से यह शिखर बैठक काफी अहमियत रखती है।

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