Forces

एक ब्रिगेडियर जिसने भारत की सेवा के लिए ठुकराया जिन्ना का प्रस्ताव, जानें 7 खास बातें

भारतीय सेना में एक ऐसा जांबाज अफसर भी था जिसने अपने शौर्य और पराक्रम के बल पर दुश्मन के दांत तो खट्टे किए ही इसके साथ-साथ देश की एकता और अखंडता की मिसाल भी दुनिया के सामने बखूबी पेश की। उसने  बताया कि जब सवाल देश की सुरक्षा का हो तो उससे बड़ा धर्म कोई नहीं होता। हम बात कर रहे हैं सन् 1947 में हुए भारत-पाक युद्ध में शहीद मोहम्मद उस्मान की। सेना का वह जांबाज जो देश के लिए अपनी अंतिम सांस तक दुश्मन से लड़ता रहा और लड़ते-लड़ते वीर गति को प्राप्त हो गया। खास बात यह है कि आज इस जांबाज का जन्मदिन है और इसी विशेष अवसर पर हम बताने जा रहे हैं उनसे जुड़ी कुछ बातें।





पिता चाहते थे आईएस बने उस्मान

मोहम्मद उस्मान

 

मोहम्मद उस्मान का जन्म 15 जुलाई, 1912 में तत्कालीन ब्रिटिश भारत के संयुक्त प्रांत(अब उत्तर प्रदेश) के मऊ जिले में हुआ। उनके पिता मोहम्मद फारुख चाहते थे कि बेटा सिविल सर्विस की पढ़ाई करे। लेकिन मोहम्मद उस्मान शुरू से ही सेना में जाने की ललक रखते थे। महज 20 साल की उम्र में ही उस्मान ने रॉयल मिलिट्री एकेडमी में दाखिला ले लिया था। मिलिट्री संस्थान द्वारा चुने गए 10 लड़कों में से उस्मान भी एक थे।

Comments

Most Popular

To Top