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सेना के कैंपों की सुरक्षा के लिए 370 नई प्लॉटून्स की रक्षा मंत्रालय से मांगी मंजूरी

भारतीय-सेना

नई दिल्ली। पठानकोट, उड़ी और नगरोटा में सेना के कैंपों पर हमलों ने इनकी सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को खोलकर रख दिया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए भारतीय सेना ने कैंपों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए रक्षा मंत्रालय से डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स (डीएससी) के 370 नई प्लॉटून्स के गठन के लिए मंजूरी देने की मांग की है। 370 प्लॉटून्स में 18,000 जवान होंगे।





सेना को देश के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों और कैंपों की सुरक्षा के लिए बेहतर ट्रेनिंग पाए और अत्याधुनिक हथियारों जैसे एके-47 असॉल्ट राइफल्स, लाइट मशीन गन से लैस जवानों की जरूरत है।

पूर्व उपसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप कैंपोस (रिटायर्ड) की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सेना की तरफ से ऐसी मांग उठी है। कैंपोस कमेटी ने अपने एक साल के व्यापक ऑडिट में सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में काफी खामियां पाई थीं। पिछले साल मई में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद तीनों सैन्य मुख्यालयों में सुरक्षा उपायों को लेकर बातचीत हुई, फिर भी सरकार कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं कर पाई।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि फिलिप कैंपोस पैनल की सिफारिशें के आधार पर आर्मी, नेवी और एयर फोर्स को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही यह भी कि सेना के तीनों अंगों ने अपनी सिक्यॉरिटी ऑडिट कर ली है, जिसके बाद किसी भी तरह की कमजोरी के समाधान के लिए कदम उठाए गए हैं।

हालांकि, अभी ढेर सारे कदम उठाए जाने बाकी हैं। कैंपोस कमेटी ने सुरक्षा के लिए घुसपैठ का पता लगाने वाली अत्याधुनिक प्रणाली को प्रभावी करने की बात कही थी। इसके अलावा बेस कैंपों की निगरानी करने वाले जवानों को नए-अत्याधुनिक हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट्स और नाइट विजन डिवाइस उपलब्ध कराने की भी सिफारिशें की गई थीं।

कमेटी ने डीएससी में भी बड़े पैमाने पर सुधार की बात कही थी। डीएससी में सशस्त्र बलों से रिटायरमेंट के बाद जवानों को फिर से नियोजित किया जाता है। डीएससी में फिलहाल 64,500 से अधिक जवान हैं। इससे सहमत होते हुए सेना ने 370 नए प्लाटूंस की मांग की है। रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, हर प्लाटून को कम से कम 2 लाइट मशीन गन, हल्के 2.5 टन वाहन के अलावा बुलेट प्रूफ जैकेट, हेडगियर और नाइट विजन डिवाइसों से भी लैस करने की मांग की गई है। गौरतलब है कि एक प्लाटून में एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) और 55 अन्य दूसरे रैंक होते।

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