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इमरजेंसी में कैंटोनमेंट सड़कों पर आम आवाजाही बंद कर सकेगी सेना

कैंटोनमेंट की सड़कें

नई दिल्ली। कैंटोनमेंट बोर्ड की सड़कें आम नागरिकों के लिए खोलने को लेकर पहले रक्षा मंत्रालय ने सेना की तरफ से बयान जारी कर स्थानीय मिलिट्री अथॉरिटी को फ्री हैंड देने की बात कही थी। वहीं सैन्य अधिकारियों के परिवार लगातार सुरक्षा के मद्देनजर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश से साफ है कि बिना रक्षा मंत्रालय की सहमति के लोकल मिलिट्री अथॉरिटी सड़कों को स्थाई तौर पर बंद नहीं कर सकती। हां, आपातकाल की स्थिति में दो हफ्ते के लिए ही सड़कों को बंद किया जा सकता है।





रक्षा मंत्रालय की ओर से सभी सड़कें खोलने का आदेश जारी होने के बाद पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों के परिवारजनों  का विरोध देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने इस मसले परबैठक बुलाई जिसके बाद कहा गया कि लोकल मिलिट्री अथॉरिटी के पास पूरी छूट है कि वह इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर या इमरजेंसी में कैंटोनमेंट में आवाजाही को नियंत्रित या बंद कर सकें। लेकिन एक अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार सोमवार को जारी रक्षा मंत्रालय  के आदेश में कहा गया है कि पूरी प्रकिया का पालन किए बिना कैंटोनमेंट एरिया की कोई भी सार्वजानिक सड़क लोकल मिलिट्री अथॉरिटी बंद नहीं कर सकती।

यह होगी सड़क बंद करने की प्रक्रिया

इस आदेश के अनुसार सड़कें बंद करने का ड्राफ्ट ऑर्डर तीन स्थानीय अखबारों और कैंट बोर्ड की वेबसाइट पर प्रकाशित कर जनता से उनके सुझाव या आपत्तियां मंगानी होंगी। ड्राफ्ट ऑर्डर रक्षा मंत्रालय को भेजना होगा। इमरजेंसी में अगर सड़कें बंद करनी पड़ी तो भी इसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय के पास भेजनी होगी।

 रक्षक की राय :  देश में सुरक्षा हालातों को देखते हुए सैन्य शिविर छावनी व् सेना प्रतिष्ठान की हिफाजत सर्वोपरि होनी चाहिए। सेना कहीं सड़कें य रास्ता इसलिए बंद करती  है और तलाशी इस कारण से लेती  है कि सुरक्षा के प्रति वह सजग सतर्क होती है। छावनी परिषद् का सारा क्षेत्र सभी के लिए सर्व सुलभ होना उचित है।

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