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कश्मीर में फंसी गर्भवती के लिए ‘सुपरमैन’ बनी सेना

श्रीनगर: जबरदस्त बारिश, हिमस्खलन और बर्फबारी। इस पर आधी रात का घना अंधेरा हालात को और भयानक रूप दे रहा था। ऐसे में सायरन की तेज आवाज ने पूरे माहौल को और डरावना बना डाला। कश्मीर में बांदीपुरा से श्रीनगर के रास्ते पर जब ये हुआ तो एकबारगी तो सैनिकों को भी समझ नहीं आया कि ये क्या हो हुआ है। दौड़कर जब ये सैनिक टुकड़ी पहुंची तो वहां सवाल खड़ा हुआ दो जिंदगियों को बचाने का।





जवानों ने देखा कि वहां एक एम्बुलेंस खड़ी है जिसमें एक गर्भवती तड़प रही थी। महिला को अस्पताल पहुंचाना था लेकिन एम्बुलेंस बीच रास्ते में खराब हो गई। ड्राइवर कोशिश करके हार चुका था, एम्बुलेंस ठीक ही नहीं हो रही थी। गर्भवती के साथ उसके पति अब्दुल अहमद खान थे लेकिन उनके भी हाथ पांव फूल गए थे। इतना ही नहीं आगे रास्ता भी बंद था।

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देश की सुरक्षा में तैनात राष्ट्रीय रायफल्स के इन जवानों ने अपने हथियार और सामान कंधे पर डाले और बर्फबारी के बीच इस गर्भवती की मदद में जुट गए। जवान तब तक इस एम्बुलेंस को धकेलते रहे जब तक वह स्टार्ट नहीं हुई। …और इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। करीब पांच सौ मीटर तक एम्बुलेंस को धक्का लगाने के बाद कामयाबी हाथ लगी। जवानों ने एम्बुलेंस को उस जगह तक पहुंचाने में भी मदद की जहां से आगे का रास्ता साफ था।

इस बीच एम्बुलेंस में बैठे खान ने पत्नी और बच्चे के बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। बस ऊपर वाले से दुआ मांग रहे थे और सुपर हीरो बनकर आए सैनिकों को दुआ दे रहे थे।

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करीब 12 घंटे बाद यानि अगले दिन दोपहर को एस. के. बाला आर्मी कैम्प के कम्पनी कमांडर को फोन आया। फोन खान ने किया था-अगर फौजी मदद को न आते तो हमारे साथ कुछ भी हो सकता था। मेरी पत्नी और मेरा बेटा आज उन्ही की बदौलत जिंदा हैं। मैं और मेरा परिवार हमेशा उन फौजियों को दुआएं देते रहेंगे।

ये फोन खान ने बांदीपुरा अस्पताल से किया था। उनकी पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया। दोनों स्वस्थ हैं।

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