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सैन्य बलों में भर्ती, युवाओं को खुद जागरूक होना होगा

भारतीय सेना में नौकरी पाने की ललक के साथ आए 135 मुन्ना भाइयों को पिछले एक पखवाड़े में भर्ती रैलियों में पकड़ा गया है। ये युवक झूठे प्रमाण पत्रों, जाली दस्तावेजों, फर्जी आधार कार्ड, ग्राम प्रधानों के झूठे सर्टिफिकेट और गलत बयानी के आधार पर सेना में हर हाल में प्रवेश पाना चाहते थे। यह मामला उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नौ दिवसीय सेना भर्ती रैली के दौरान सामने तब आया जब दलालों की सक्रियता से इस क्षेत्र के युवा दुनिया की जाबांज भारतीय सेना में घुसने की जुगत बिठा रहे थे। ये घटनाएं सरकार, सेना व समाज के लिए गंभीर, चिंताजनक व परेशानी पैदा करने वाली हैं। आखिर कौन सी वजहें हैं कि देश के होनहार, प्रतिभा संपन्न युवा, बेईमान, छल-प्रपंच-कपट में पूरी तरह सने दलालों के चंगुल में फंस रहे हैं? वो भी इस हद तक कि भारतीय सेना को धता बताने से नहीं चूक रहे। यह समूची व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।





इस भर्ती रैली में एक ऐसी घटना घटी जो चौंकाने वाली है। चूंकि उत्तराखंड में ऊंचाई (लंबाई) के मानक कम हैं लिहाजा शातिर दिमाग के दलाल मैदानी क्षेत्र के युवाओं को पर्वतीय क्षेत्र के भर्ती कार्यालयों से नौकरी दिलाने का झांसा देते हैं। ऐसा ही पिछले सप्ताह रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) के युवाओं की भर्ती के दौरान देखा गया। तड़के करीब तीन बजे मैदान में प्रवेश के समय सेना के जवान की निगाह सिर पर पटका बांधे एक लंबे-चौड़े युवक पर पड़ी। संदेह होने पर सैनिकों ने युवक को लाइन से बाहर ले जाकर उससे गढ़वाली भाषा में पूछताछ की, पर युवक गढ़वाली में जवाब देने में नाकाम रहा। सख्ती से पूछताछ पर उसने लाइन में लगे चार अन्य युवकों के बारे में भी बताया। ये सभी अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। इसी तरह अफसरों ने बुलंदशहर, शामली, सहारनपुर, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, मथुरा आदि के क्षेत्र के युवाओं को पकड़ा है। हाल के दिनों में देश के दूसरे क्षेत्रों में सेना, सशस्त्र बल व राज्य पुलिस में भर्ती के दौरान कमोबेश ऐसी घटनाओं से अधिकारी हतप्रभ और सतर्क हो गए हैं।

दरअसल सेना के अधिकांश इलाकों के स्कूल-कॉलेजों में अभी भी शिक्षा देने का ऐसा ढांचा तैयार नहीं है जो किशोरों-युवाओं को एक सार्थक सोच के साथ जागरूक व सक्षम बना सके। ऊपर से समाज और विशेष रूप से अभिभावक आज भी इस बात को पूरी तरह से समझने को तैयार नहीं है कि सेना तथा सशस्त्र बलों में भर्ती पूरी तरह निष्पक्ष, बगैर घूस और निर्धारित मानदंडों के आधार पर होती है। ऐसे में सर्वप्रथम जरूरी यह है कि भर्ती के लिए इच्छुक युवक-युवतियां, उनके माता-पिता इस बात के लिए अपना मन बनाएं कि वे किसी के झांसे में नहीं आएंगे। सतर्क और चौकन्ना होना ही प्रथम सफलता है, जो सूचना और जानकारी जुटाने से आती है।

हकीकत में दलाल और कपटी मानसिकता के व्यक्ति समाज में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी इस लिए करते हैं कि इच्छित व्यक्ति के पास पूरी जानकारी नहीं होती। सेना के तीनों अंग-आर्मी, नेवी, एयरफोर्स समय-समय पर दैनिक समाचार पत्रों के जरिए सावधान करते रहते हैं कि दलालों से बचें। वे यह भी कहती हैं कि उनके यहां किसी भी स्तर पर जैसे आवेदन, लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा, मेडिकल जांच मेरिट बनने के समय पैसे देने की जरूरत नहीं होती। दलाल युवाओं की इसी अज्ञानता का फायदा उठाते हैं और कई बार तो नकली वेबसाइट बनाकर ठगते हैं। देश के युवाओं को चाहिये कि सेना तथा सशस्त्र बलों के विभिन्न पदों पर नौकरी पाने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रकाशित ‘रोजगार समाचार’ का सहारा लें जो हर सप्ताह प्रकाशित होता है। सिलेबस को ध्यान में रखकर अपनी लिखित तैयारी और शारीरिक मानदंड़ों को ध्यान में रखकर फिजिकल फिटनेस को चुस्त-दुरुस्त करें। जिला प्रशासन, जिला रोजगार कार्यालय तथा सैन्य बलों को भी चाहिए कि ग्रमीण इलाकों के स्कूल-कॉलेजों में भर्ती संबंधी कार्यशालाएं व प्रदर्शनी का ज्यादा से ज्यादा आयोजन करें ताकि काबिल, ईमानदार व देश प्रेम से ओतप्रोत सैन्य बलों में शामिल हो सकें।

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