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आइए, आपको मिलाते हैं इंडिया की इन ‘सुपर वुमेन पावर’ से

8 मार्च यानि इंटरनेशनल वुमेन डे! महिलाओं के कंधों पर आज के समय में घर चलाने से लेकर सीमा सुरक्षा तक की जिम्मेदारी है। महिलाएं हर काम करने में आगे हैं। आज आलम यह है कि जल, थल, वायु हर क्षेत्र में महिलाएं सुरक्षा बलों में शामिल हैं। कुछ की कमान तो महिलाएं ही संभाल रही हैं।





एक समय था जब इंडियन आर्मी में महिलाओं की भागीदारी नहीं हुआ करती थी लेकिन जब महिलाओं को इसमें जाने का मौका मिला तो उन्होंने खुद को साबित किया। महिलाओं ने वह कर दिखाया जो सबके बस की बात नहीं थी। छोटे पद से लेकर बड़े पद तक महिलाओं ने अपना परचम लहराया। आइए, आज हम आपको भारत की कुछ ऐसी ही ‘सुपर वुमेन’ के बारे में बताते हैं…

किरण बेदी

भारत की प्रथम महिला आईपीएस अधिकारी डॉ. किरण बेदी, सामाजिक कार्यकर्ता, भूतपूर्व टेनिस खिलाड़ी एवं राजनेता हैं। फिलहाल वह पुडुचेरी की उपराज्यपाल हैं। 35 वर्ष की पुलिस सेवा के बाद सन 2007 में उन्होने स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली। उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी कार्य-कुशलता का परिचय दिया है। वह दिल्ली पुलिस में संयुक्त आयुक्त (प्रशिक्षण) तथा विशेष आयुक्त (खुफिया) पद पर कार्य कर चुकी हैं।

कंचन चौधरी भट्टाचार्य

कंचन-चौधरी-भट्टाचार्य

किरण बेदी के बाद आईपीएस अधिकारी बनने वाली दूसरी महिला हैं कंचन चौधरी भट्टाचार्य। कंचन 1973 बैच की हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर की पहली महिला IPS अधिकारी होने का भी गौरव प्राप्त है। वह किसी राज्य की पुलिस महानिदेशक बनने वाली पहली महिला हैं। वह उत्तराखंड की DGP रहीं और 31 अक्टूबर 2007 को इसी पद से सेवामुक्त हुईं। रिटायरमेंट के बाद वह भी किरण बेदी की तरह राजनीति में आईं और 2014 के आम चुनाव में हरिद्वार से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गईं। किरण बेदी ने भी राजनीतिक पारी का आगाज आम आदमी पार्टी से ही किया था।

प्रिया झिंगन

प्रिया झिंगन: इंडियन आर्मी की पहली महिला कैडेट 21 सितंबर 1992… यह वह दिन था जब किसी महिला कैडेट ने अपना नामांकन इंडियन आर्मी में किया था। प्रिया इंडियन आर्मी की पहली महिला कैडेट थीं। उनका इनरोलमेंट नंबर 001 था। उन्होंने 10 वर्षों तक अपनी सेवा भारतीय सेना को दी। प्रिया झिंगन ने अपनी ग्रेजुशन कम्प्लीट करने के बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल सुनीत फ्रांसिस रोड्रिग्स को पत्र लिखकर महिलाओं को भी सशस्त्र बलों में शामिल करने की बात कही थी।

जनरल सुनीत ने प्रिया के पत्र का जवाब देते हुए लिखा कि इसके लिए प्लान किया जा रहा है और संभवत: एक या दो वर्ष में महिलाओं को सशस्त्र बलों में शामिल किया जाए। प्रिया पुलिस ऑफीसर बनने की तैयारी कर रही थीं लेकिन जैसे ही उन्हें जनरल सुनीत का जवाबी पत्र मिला तो उन्होंने पुलिस ऑफीसर बनने का इरादा छोड़ दिया और आर्मी के बुलावे का इंतजार करने लगीं।

1992 में आर्मी द्वारा महिलाओं को ज्वाइनिंग के लिए फुल पेज का विज्ञापन दिया गया तो प्रिया यह जानती थीं कि उनका सेलेक्शन पक्का है। उसमें दो सीट लॉ की पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए थी। प्रिया ने भी कानून की पढ़ाई कर रखी थी तो उनका आर्मी में जाना तय था।

मेजर मिताली मधुमिता

मेजर मिताली मधुमिता भारत की पहली ऐसी महिला अधिकारी बनीं जिन्हें वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया

मेजर मिताली मधुमिता भारतीय सेना में अपनी बहादुरी और विशिष्ट सेवा के लिए गैलेंट्री अवार्ड जीतने वालीं पहली महिला थीं। काबुल में नूर गेस्ट हाउस में उन्होंने तालिबानी आतंकियों के हमले के बावजूद अपने घायल साथी अधिकारियों को बचाया था। दक्षिण पश्चिमी कमान द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मेजर मिताली को सैन्य स्टेशन पर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये वीरता पुरस्कार दिया गया। मधुमति पहली ऐसी महिला अधिकारी हैं जिन्हें भारतीय सेना ने सेना मेडल से सम्मानित किया।

मिताली मधुमिता ने वर्ष 2010 में  काबुल स्थित भारतीय दूतावास के कर्मियों पर आतंकवादी हमले के दौरान साहस का परिचय दिया था और गंभीर रूप से घायल लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभायी थी। भारतीय सेना में मिताली पहली महिला अधिकारी होंगी, जिन्हें शौर्य पदक से सम्मानित किया जायेगा।

लेफ्टिनेंट अंजना मोहन

लेफ्टिनेंट अंजना मोहन पहली महिला कैडेट हैं जिसे गोल्ड मेडल और स्वार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया

लेफ्टिनेंट अंजना मोहन भरतनाट्यम डांसर के साथ एक अधिवक्ता भी रही हैं। वह पहली महिला कैडेट हैं जिसे गोल्ड मेडल और स्वार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। क्‍लासिकल डांसर के बाद वकील और फिर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, मात्र 25 साल की उम्र में मुंबई की अंजना मोहन के कई रूप देखने को मिले। वह मुंबई की रहने वाली हैं। लेफ्टिनेंट अंजना मोहन पहली महिला है जिन्‍होंने भारतीय सेना की ऑफिसर ट्रेनिंग कमीशन से शॉर्ट सर्विस कमीशन 99 और शॉर्ट सर्विस कमीशन (महिला) 13 में गोल्‍ड मेडल के साथ स्‍वॉर्ड ऑफ ऑनर का सम्‍मान भी प्राप्‍त किया है।

लेफ्टिनेंट रूचि वर्मा

रूचि वर्मा अपने पति मेजर विनीत वर्मा के साथ (इनसेट में लेफ्टिनेंट बनने के बाद)

30 अप्रैल 2013 तक रुचि वर्मा की बस इतनी ही पहचान थी कि वह सेना में मेजर विनीत वर्मा की पत्नी हैं। उस वक्त वह काम के नाम पर बच्चे संभालती, खाना बनाती और पार्टी अटैंड करती। लेकिन 30 अप्रैल 2013 को अचानक जिंदगी ने ऐसी करवट ली कि अचानक सब कुछ बदल गया। दरअसल, असम में एक उग्रवाद विरोधी अभियान में मेजर विनीत शहीद हो गए। खैर, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पति की शहादत के पांच महीने बाद ही रुचि ने फौज में अफसर बनने के लिये फार्म भर दिया और अफसर बनने के लिये जरूरी एसएसबी परीक्षा भी पास कर ली और आज वह रुचि वर्मा से लेफ्टिनेंट रुचि वर्मा बन गई हैं।

जब नाम के आगे ‘रैंक’ लगी तो सब कुछ बदल गया- पहले कपड़े, फिर बाल, साड़ी की जगह हरी फौजी वर्दी ने ली है और बाद में सबसे जरूरी एक नई पहचान मिली। अब वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना का हिस्सा है।

कैप्टन प्रिया सेमवाल

प्रिया सेमवाल

आतंकियों से लड़ते हुए पति नायक अमित शर्मा शहीद हो गए थे। पति के शहीद होने पर प्रिया सेमवाल टूट चुकी थीं लेकिन उन्होंने पति के सम्मान के लिए ही आर्मी में जाने का फैसला लिया। सेना में भर्ती होने वाली पहली महिला ऑफिसर दून की बेटी कैप्टन प्रिया सेमवाल को वीर नारी सम्मान से नवाजा जा चुका है। उन्हें यह सम्मान वॉर विडो एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से दिया गया है।

20 जून 2012 को अरुणाचल में सेना के ऑपरेशन ऑर्किड में दून निवासी 14 राजपूत रेजीमेंट के नायक अमित शर्मा शहीद हो गए थे। उनकी शहादत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। प्रिया के लिए यह वक्त इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उनके पास एक छोटी बेटी ख्वाहिश की जिम्मेदारी आ गई थी। बावजूद इसके प्रिया ने सेना में जाने का कठोर फैसला लिया। गांव धोरण निवासी प्रिया के परिवार और गढ़ी कैंट स्थित ससुराल पक्ष के लिए प्रिया का यह फैसला बहुत अटपटा था लेकिन बाद में उन्होंने इसका समर्थन किया। 15 मार्च 2014 को प्रिया ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नई से बतौर लेफ्टिनेंट पासआउट हुईं। आज प्रिया के नाम के आगे कैप्टन का रैंक भी जुड़ गया है।

गेनेवी लालजी

पहली बार इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट गेनेवी लालजी को सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमाडिंग इन चीफ की एडीसी बनाया गयालालजी एक यंग इंटेलीजेंस ऑफिसर हैं। उन्होंने तब इतिहास बना दिया जब उन्हें एक आर्मी कमांडर का एडीसी बनाया गया। लालजी भारत की पहली महिला खुफिया लेफ्टिनेंट हैं। भारतीय इतिहास में पहली बार खुफिया अधिकारी लेफ्टिनेंट के पद के लिए किसी महिला अधिकारी को चुना गया था। ADC वह अधिकारी होते हैं जो सेना प्रमुख और सेना कमांडरों समेत शीर्ष अधिकारियों के निजी सहायकों के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं।

तीसरी पीढ़ी की सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट लालजी को साल 2011 में कोर ऑफ मिलिट्री इंटेलीजेंस में कमीशन दिया गया था और उन्होंने पुणे में युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान कई उपलब्धियां हासिल कीं।

ADC बनना बहुत ही मुश्किल होता है और इनका चयन मुश्किल प्रक्रिया के बाद होता है। बल में महिला अधिकारियों के प्रोत्साहन और उत्साह के स्तर को मापने के लिए कराए गए एक अध्ययन के बाद तत्कालानी आर्मी चीफ बिक्रम सिंह ने गेनेवी लालजी को ADC बनाने का कदम उठाया था। इस प्रक्रिया में करीब 350 महिला अधिकारियों का इंटरव्यू लिया गया और कठिनाइयों में उनका साहस, उनकी क्षमता और मजबूती को परखा गया। जिसके बाद उन्हें यह पद मिला ।

अंजना भदौरिया

अंजना भदौरिया

बात सन 1992 की है, जब माइक्रोबायोलॉजी में मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद अंजना भदौरिया चंडीगढ़ स्थित एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में काम कर रही थीं। उन दिनों पहली बार सेना में महिला अफसरों की बहाली के लिए वीमेन स्पेशल एंट्री स्कीम का विज्ञापन निकला। इस विज्ञापन पर अंजना की भी नजर गयी और उन्होंने इसके लिए आवेदन कर दिया। अंजना की खुशकिस्मती थी कि वह भारतीय थल सेना के महिला कैडेटों के पहले बैच के लिए चुन भी ली गयीं। सेना के लिए उन्होंने 10 सालों तक काम किया। इस दौरान उनका सर्विस नंबर 00001 रहा और उन्हें सेना का स्वर्ण पदक पाने वाली पहली महिला होने का गौरव भी प्राप्त हुआ।

लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी

लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी एक मल्टी नेशन एक्सरसाइज में भारत का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं

लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी एक मल्टी नेशन एक्सरसाइज में भारत का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। एक्सरसाईज फोर्स-18, भारत द्वारा आयोजिस सबसे बड़ा युद्धाभ्यास होता है। इसमें हिस्सा लेने वाले 18 दलों में वह नेतृत्व करने वाली एकमात्र महिला अधिकारी हैं। गुजरात की रहने वालो सोफिया बायोकेमिस्ट्री से पोस्टग्रेजुएट हैं। वर्तमान में देश की सेवा कर रही सोफिया भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के अंतर्गत 1999 में शामिल हुईं थी। उस दौरान उनकी उम्र महज 17 साल की थी। सोफिया सेना के सिग्नल कार्प्स में ऑफिसर हैं। आपको बता दें कि वह आर्मी बैकग्राउंड से ताल्‍लुक रखती हैं, उनके दादा भी सेना में थे। उनके पति मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री में आर्मी ऑफिसर हैं।

कैप्टन दिव्या कुमार

कैप्टन दिव्या अजीथ कुमार भारतीय सेना में पहली महिला कैडेट हैं जिसे स्वार्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया

कैप्टन दिव्या अजीथ कुमार भारतीय सेना में पहली महिला कैडेट हैं जिसे स्वार्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया और उन्होंने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2015) के अवसर पर सेना की एक ऑल वूमेन कंटीजेंट का परेड में नेतृत्व किया था। दिव्या भरतनाट्यम में पारंगत हैं और खेल के क्षेत्र में भी आगे रहती थीं। कैप्टन दिव्या कुमार आज भी अपनी ड्यूटी क्षेत्र के आस-पास के स्कूलों में जाती हैं और वहां लड़कियों को आर्मी में आने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। दिव्या के प्रोत्साहन के चलते बहुत सी महिलाओं ने आर्मी को ज्वाइन किया है।

कैप्टन दिव्या कुमार चेन्नई की रहने वाली हैं और एक तमिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने बचपन में राजपथ पर परेड को देखकर आर्मी में जाने का सपना संजोया। उन्होंने अपने स्कूल में एनसीसी (NCC) ज्वाइन की और बाद में ऑफीसर ट्रेनिंग अकादमी (OTA) ज्वाइन की। आज दिव्या के नाम के आगे कैप्टन रैंक जुड़ा हुआ है।

निवेदिता चौधरी

निवेदिता चौधरी माउंट एवरेस्ट पर जाने वाली एयरफोर्स की पहली महिला अफसर हैं

निवेदिता चौधरी माउंट एवरेस्ट पर जाने वाली एयरफोर्स की पहली महिला अफसर हैं। उनकी टीम में एयरफोर्स अफसर स्क्वाड्रन लीडर निरुपमा पांडे और फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजिका शर्मा भी थीं, जो 5 दिन बाद शिखर पर पहुंची थीं। साल 2013 में यह कीर्तिमान बनाने वाली निवेदिता राजस्थान की भी पहली महिला बनी थीं।

स्नेहा शेखावत- फ्लाइट लेफ्टिनेंट, एयरफोर्स

स्नेहा शेखावत

स्नेहा शेखावत ने 26 जनबरी, 2012 को दिल्ली में राजपथ पर 63rd रिपब्लिक डे परेड में एयरफोर्स परेड को लीड किया था। ऐसा करने वाली वह एयरफोर्स की पहली अफसर हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट सबसे ताकतवर प्लेन उड़ा चुकी हैं।

पूजा ठाकुर- इंडियन एयरफोर्स

पूजा ठाकुर

25 जनवरी, 2015 को विंग कमांडर पूजा ठाकुर ने राष्ट्रपति भवन में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के गार्ड ऑफ ऑनर की अगुआई की। ऐसा करने वाली वह भारत की पहली महिला अधिकारी बनीं।

कैप्टन रूचि शर्मा

कैप्टन रूचि शर्मा भारत की पहली महिला ऑपरेशनल पैराट्रूपर

कैप्टन रुचि शर्मा भारत की पहली महिला ऑपरेशनल पैराट्रूपर थीं। वह 10 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद 2003 में रिटायर हुई थीं। रूचि शर्मा उन तमाम भारतीय सेना में शामिल में हुई महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने भारतीय सेना का चेहरा बदला। वह एक प्रोफेशनल पैराट्रूपर हैं।

रुचिका शर्मा- मेजर, इंडियन आर्मी

आर्मी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली मेजर रुचिका शर्मा पहली फीमेल अफसर बनीं

आर्मी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली मेजर रुचिका शर्मा पहली फीमेल अफसर बनीं। इसके पहले आर्मी की ओर से पुरुष अफसर ही मीडिया से मुखातिब होते थे। मेजर रुचिका ने मणिपुर हमले के बाद सेना के क्रॉस बॉर्डर मिशन की जानकारी दी थी।

बीएसएफ की पहली महिला आईपीएस अफसर

आईपीएस सतवंत अटवाल त्रिवेदी

सीमा की सुरक्षा में लगे सबसे बड़े बल सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सतवंत अटवाल त्रिवेदी के रूप में पहली महिला आईपीएस अधिकारी मिलीं। वह 1996 बैच की हिमाचल प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। सतवंत अटवाल हिमाचल प्रदेश में अपराध एवं साइबर सुरक्षा महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर रह चुकी हैं और वह हिमाचल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। बीएसएफ में उन्हें उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर नियुक्त किया गया था।

सशस्त्र सीमा बल की पहली महिला DIG सोनम

सशस्त्र सीमा बल की पहली महिला DIG सोनम

अरुणाचल प्रदेश की सोनम किसी जमाने में यहाँ के एक सरकारी स्कूल में जूनियर टीचर थी। उन्होंने मेहनत की और फिलहाल वह फोर्स में हैं और सशस्त्र सीमा बल की पहली महिला DIG बन गई है। सोनम का पूरा नाम है सोनम युदरोन जो अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कमेंग जिले के दिरांग की रहने वाली है। यह इलाका चीन और भूटान से सटी अंतर्राष्ट्रीय सीमा में है।

1984 में भर्ती परीक्षा टॉप करने के बाद सोनम सर्किल ऑर्गनाइजर के तौर पर SSB का हिस्सा बनीं। इसके बाद 1991 में एरिया ऑर्गनाइजर और अब DIG। सोनम SSB में इस ओहदे तक पहुँचने वाली देश की दूसरी महिला हैं।

सशस्त्र सीमा बल की चीफ अर्चना रामसुंदरम

सशस्त्र सीमा बल की चीफ अर्चना रामसुंदरम

अर्चना रामसुंदरम एसएसबी की पहली महिला चीफ हैं। देश में इस समय पांच अर्द्धसैनिक बल हैं-सशत्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस। इनमें से किसी भी बल में कभी कोई महिला प्रमुख नहीं रही। अर्चना रामसुंदरम पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें एसएसबी का चीफ बनने का गौरव मिला। वह तमिलनाडु कैडर की 1980 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं।

शांति तिग्गा : सेना में शामिल होने वाली पहली महिला जवान

शांति तिग्गा

पुरुषों के लिए सुरक्षित माने जाने वाली भारतीय सेना में पहली बार एक महिला जवान को शामिल किया गया है जो दो बच्चों की मां है। शारीरिक परीक्षण में अपने पुरुष समकक्षों को पीछे छोड़ते हुए 35 वर्षीय सैपर शांति तिग्गा को 969 रेलवे इंजीनियर रेजीमेंट आफ टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया गया है। तिग्गा ने 13 लाख रक्षा बलों में पहली महिला जवान बनने का अनोखा गौरव हासिल किया है। उन्होंने कहा कि उसने सभी शारीरिक परीक्षण में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। उसने 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में पांच सेकंड कम वक्त लिया। उसने 50 मीटर की दूरी 12 सेकंड में तय की जिसे उत्कृष्ट माना गया।

नौसेना की पहली नौका महिला कप्तान

नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी नौसेना की नौका महादेई की पहली महिला कप्तान हैं

नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी नौसेना की नौका महादेई की पहली महिला कप्तान हैं। इस पोत के चालक दल में लेफ्टिनेंट पी स्वाति, लेफ्टिनेंट प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट विजया देवी, सब-लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता और लेफ्टिनेंट ऐश्‍वर्या शामिल हैं। इस पोत को सिर्फ महिलाएं ही चलाती हैं। नौसेना का प्रसिद्ध नौकायन पोत महादेई गोवा से 24 मई 2016 को महिला चालक दल के सदस्यों के साथ पहली बार ऐतिहासिक खुले सागर की यात्रा पर रवाना हुआ था।

निर्मला कंनन- एडमिरल, इंडियन नेवी

रीयर एडमिरल रैंक हासिल करने वाली निर्मला कंनन इंडियन नेवी की पहली टू स्टार फीमेल अफसर हैं

रीयर एडमिरल रैंक हासिल करने वाली निर्मला कंनन इंडियन नेवी की पहली टू स्टार फीमेल अफसर हैं। साल 2011 में उन्हें साउथ कमांड में मेडिकल अफसर बनाया गया। वह इंडियन आर्मी और इंडियन एयरफोर्स में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वह भारतीय विदेश सेवा अधिकारी निरुपमा राव की बहन हैं। महिला रोग विशेषज्ञ हैं और उनका पूरा परिवार इंडियन आर्मी से जुड़ा है।

वायुसेना की फाइटर पायलट तिकड़ी

देश में पहली बार तीन महिलाएं वायुसेना के लड़ाकू विमानों की पायलट बनी हैं। अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह। ये तीनों देश की पहली महिलाएं हैं, जिन्हें वायुसेना के लड़ाकू विमानों के पायलट के तौर पर कमीशन दिया गया। अवनि मध्य प्रदेश के रीवा से हैं। उनके पिता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और भाई आर्मी में हैं। भावना बिहार के बेगूसराय की रहने वाली हैं। मोहना गुजरात के वडोदरा की हैं। उनके पिता एयरफोर्स में वारंट अफसर हैं।

हरिता कौर देओल : भारतीय वायुसेना की पहली महिला पायलट

हरिता कौर देओल

हरिता कौर देओल एक महिला पायलट थी जो कि भारतीय वायु सेना में कार्यरत थीं। साथ ही ये भारत की पहली महिला पायलट थीं। इनका जन्म पंजाब के चंडीगढ़ में एक सिख परिवार में हुआ था।

पद्मा बंदोपाध्याय: पहली महिला एयर वाइस मार्शल

डॉ पद्मा बंदोपाध्याय भारत की पहली महिला एयर वाइस मार्शल हैं

डॉ पद्मा बंदोपाध्याय भारत की पहली महिला एयर वाइस मार्शल हैं। वह भारतीय वायु सेना की एयर कमोडोर पद पर पदोन्नत होने वाली पहली महिला अधिकारी और भारत के एयरोस्पेस मेडिकल सोसायटी की पहली सदस्य हैं। वह उत्तरी ध्रुव में वैज्ञानिक अनुसंधान करने वाली पहली भारतीय महिला हैं। पद्मा बंदोपध्याय की एक और उपलब्धि यह है कि वह भी रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। 1973 में उन्हें विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुआ और 1991 में उन्हें एएफएचए सम्मान मिला था।

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