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जब इस मेजर ने कहा… हम यहां सोने नहीं, आपको बरबाद करने आए हैं

इआन-कारडोज़ो

भारतीय सेना की उच्च कोटि की परम्पराओं और सैनिकों की एक दूसरे का ख्याल रखने की आदत किस तरह से उनके स्वभाव में आ जाती है, इसकी कई मिसालें हैं। भारतीय सेना की इस खूबी की तारीफ जब स्वदेशी के बजाय कोई विदेशी करे और वो भी दुश्मन सैनिक तो वाकया बताने लायक तो है ही।





इस घटना का जिक्र मेजर जनरल (रिटायर्ड) इआन कारडोजो ने एक इंटरव्यू के दौरान किया। वही इआन कारडोजो, जो 1971 में बंग्लादेश के गठन के वक्त हुए युद्ध में बारूदी सुरंग फटने से इतने घायल हो गए थे कि उनकी टांग काटे जाने के हालात बन गए थे। लेकिन मेडिकल मदद या डॉक्टर के ना होने पर और तुरंत टांग काटे जाने की जरूरत महसूस होने पर उन्होंने खुद अपनी खुकरी से अपनी टांग काट डाली थी।

  • और कारडोज़ो को सैल्यूट ठोंक कर बोला- जनाब अगर हमारी फौज में भारत जैसे अफसर होते तो ये दिन हमने देखना था क्या ?

ढाका के पास सिलहट में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। दोनों देशों के अफसर और सैनिक वहीं थे। पांचवीं गोरखा राइफल्स के जवान जब सिलहट (अब जलालाबाद) पहुंचे तो साजो सामान की तैयारी आधी-अधूरी थी। सिलहट पर तुरंत कब्जे के लिए बढ़ने का आदेश मिला था। महीना दिसंबर का था और रात को ठंड जबरदस्त हो जाती थी।

मेजर-इआन-कारडोजो

मेजर इआन कारडोजो पाकिस्तानी JCO के सैल्यूट के किस्से सुनाते हुए (फाइल फोटो)

मेजर कारडोज़ो ने तब पाकिस्तान के एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) से पूछा कि क्या उनके स्टोर में कुछ कम्बल हैं। सकारात्मक जवाब मिलने पर कारडोज़ो ने उसे कुछ कम्बल देने को कहा ताकि कुछ भारतीय अफसरों को दिए जा सकें। तब उस JCO ने हैरानी से पूछा क्या आप कम्बल नहीं लाए। इस पर कारडोज़ो ने उसे जवाब दिया- हम यहां सोने नहीं, आपको बरबाद करने के लिए आए हैं।

पाकिस्तानी JCO ने ये बात किसी तरह सहन कर ली। तभी कारडोज़ो ने फिर उससे पूछा कि अगर कुछ कम्बल बचे हों तो हमारे अफसर साहबान को दे सकते हो? JCO ने जवाब देने के बजाय सवाल ही दाग दिया- क्या अफसर भी कम्बल नहीं लाए? कारडोज़ो ने जब उसे बताया कि जवानों के लिए कम्बल नहीं हैं तो अफसर साहबान के पास कहां से होंगे तो पाकिस्तानी JCO के हाव भाव ही बदल गए। वो सावधान की मुद्रा में आ गया और कारडोज़ो को सैल्यूट ठोंक कर बोला- जनाब अगर हमारी फौज में भारत जैसे अफसर होते तो ये दिन हमने देखना था क्या ?

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