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वीरचक्र से सम्मानित शहीद की विधवा को 46 साल बाद इंसाफ

ट्रिब्यूनल कोर्ट

नई दिल्ली। 46 साल पहले वीर चक्र से सम्मानित शहीद कैप्टन एसके सहगल की विधवा जनक आनंद को अब न्याय मिला है। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (एएफटी) ने वीर चक्र से सम्मानित शहीद की विधवा जनक आनंद को मिलने वाली सभी वित्तीय सुविधाएं बहाल करने और बकाए का भुगतान करने का आदेश जारी किया है।





एएफटी ने उस नीति को भी खारिज कर दिया है कि शहीद की विधवा अगर उसके भाई के साथ शादी नहीं करती है तो उसकी सारी सुविधाएं रोक दी जाएंगी। ट्रिब्यूनल ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन माना।

जस्टिस वीके शाली और लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिंह की पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति शहीद की की विधवा को उसकी पति की वीरता के लिए पुरस्कार देते हैं लेकिन उसको मिलने वाली वित्तीय सुविधाएं रोककर उसका अपमान किया जाता है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है जिसके तहत हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है। इसके तहत सरकार की वह नीति खारिज की जाती है जिसमें वीरता पुरस्कार विजेता की विधवा को शादी की वजह से वित्तीय सुविधाओं को महरूम कर दिया जाता है।

क्या है पूरा मामला ?

पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में कैप्टन एसके सहगल शहीद हो गए थे। अदम्य साहस दिखाने के लिए 1972 में उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। दो वर्ष बाद कैप्टन सहगल की विधवा जनक ने मेजर दीपक आनंद से विवाह कर लिया। इसके बाद सरकार ने वीरता पुरस्कार से जुड़ी उनकी वित्तीय सुविधाएं रोक दीं। इसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद सैन्य ऑफिसरों ने कोई एक्शन नहीं लिया तो उन्होंने ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया।

बकाया 10 फीसदी ब्याज के साथ मिलेगा

ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया है कि शहीद की विधवा को वीर चक्र विजेता को मिलने वाली सभी बकाया 10 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस लौटाया जाए। बकाए का हिसाब उस दिन से लगाया जाएगा जिस दिन से वह इन सुविधाओं की हकदार थी।

 

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