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‘विद्या-वीरता अभियान’ : जानिए, सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता इस योद्धा की वीर गाथा

परमवीर चक्र विजेता ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव

नई दिल्ली: सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने ‘विद्या-वीरता अभियान’ की तारीफ करते हुए कहा कि यह अभियान युवाओं के अंदर राष्ट्रवाद की सोच को विकसित करेगा। विद्या और वीरता का जो यह अभियान शुरू किया गया है यह देश के लिए एक सकारात्मक सोंच की तरफ हमारे युवाओं को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि हर युवा के अन्दर राष्ट्रवाद की भावना जागृति होगी और वह देश के प्रति खुद को समर्पित करने के लिए आगे बढ़ेगा और देश का मान-सम्मान को हमेशा ऊपर उठाएगा।





बता दें कि ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को मात्र 19 साल की उम्र में परमवीर चक्र से नवाजा गया था। उन्हें करगिल झड़प में अदम्य साहस दिखाने के लिए परमवीर चक्र सम्मान दिया गया था। गौरतलब है कि आज ‘विद्या-वीरता अभियान’ को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने लांच किया। अभियान के तहत देश के सभी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में परमवीर विजेता योद्धाओं की तस्वीरें लगाई जाएंगी। योगेंद्र सिंह यादव ने इस मौके पर बतौर परमवीर चक्र विजेता शिरकत की।

'विद्या-वीरता अभियान'

‘विद्या-वीरता अभियान’ को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मंगलवार को लांच किया

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह की कहानी केंद्रीयमंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह की जुबानी

करगिल विजय का सारा श्रेय उन जांबाजों को जाता है, जिन्होंने युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया और जान तक की परवाह नहीं की। इन्हीं में से एक जांबाज और परमवीर चक्र विजेता ग्रेनेडियर योगेंद्र की कहानी खुद केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और रिटायर्ड आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह ने बताई।

अपने एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘घातक कमाण्डो पलटन के सदस्य ग्रेनेडियर यादव को टाइगर हिल के बेहद अहम तीन दुश्मन बंकरों पर कब्ज़ा करने का दायित्व सौंपा गया था। ग्रेनेडियर यादव ने स्वेच्छा से आगे बढ़कर उत्तरदायित्व संभाला जिसमे उन्हें सबसे पहले पहाड़ पर चढ़कर अपने पीछे आती टुकड़ी के लिए रास्ता बनाना था। कुशलता से चढ़ते हुए कमाण्डो टुकड़ी गंतव्य के निकट पहुंची ही थी कि दुश्मन ने मशीनगन, RPG, और ग्रेनेड से भीषण हमला बोल दिया जिसमें भारतीय टुकड़ी के अधिकांश सदस्य मारे गए या तितर-बितर हो गए, और स्वयं यादव को तीन गोलियां लगीं। मैं चाहूंगा कि कमज़ोर दिल वाले इसके आगे न पढ़ें।’

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Posted by General V.K. Singh on Monday, July 25, 2016

वीके सिंह ने आगे लिखा, ‘पहाड़ के ऊपर पहुंचने के बाद दुश्मन की भारी गोलाबारी ने उनका स्वागत किया। अपनी दिशा में आती गोलियों को अनदेखा करके दुश्मन के पहले बंकर की तरफ यादव ने धावा बोल दिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए उसी बंकर में छलांग लगा दी, जहां मशीनगन को 4 सदस्यों का आतंकी दल चला रहा था। ग्रेनेडियर यादव ने अकेले उन सबको मौत के घाट उतार दिया। ग्रेनेडियर यादव की साथी टुकड़ी जब उनके पास पहुंची, तो उसने पाया कि यादव का एक हाथ टूट चुका था और करीब 15 गोलियां लग चुकी थीं। ग्रेनेडियर यादव ने साथियों को तीसरे बंकर पर हमला करने के लिए ललकारा और अपनी बेल्ट से अपना टूटा हाथ बांध कर साथियों के साथ अंतिम बंकर पर धावा बोल कर विजय प्राप्त की।’

परमवीर चक्र दिए जाने का किस्सा

ग्रेनेडियर यादव को परमवीर चक्र दिए जाने से संबंधित एक बेहद दिलचस्प किस्सा है। उसके बारे में भी जनरल वीके सिंह ने बताया। उन्होंने लिखा, ‘विषम परिस्तिथियों में अदम्य साहस, जुझारूपन और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। समस्या बस इतनी थी कि योगेंद्र सिंह यादव इस अविश्वसनीय युद्ध में जीवित बच गए थे और उन्हें अपने मरणोपरांत पुरस्कार का समाचार अस्पताल के बिस्तर पर ठीक होते हुए मिला। विजय दिवस पर योगेंद्र सिंह यादव जैसे महावीरों को मेरा सलाम, जिन्होंने कारगिल युद्ध में भारत की विजय सुनिश्चित की।’

योगेंद्र सिंह यादव इस वक्त 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में सूबेदार के पद पर तैनात हैं। परमवीर चक्र सम्मान दिए जाते समय उनकी उम्र महज 19 साल थी। परमवीर चक्र पाने वाले वह सबसे युवा सैनिक हैं। उनके पिता करण सिंह यादव सेना की कुमाऊं रेजिमेंट में थे। उन्होंने देश की ओर से 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लिया था।

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