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लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह की प्रतिमा का हुआ अनावरण

सगत सिंह की प्रतिमा का अनावरण

जयपुर। लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह पीवीएसएम की प्रतिमा का अनावरण  उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन आर्मी कमांडर सप्त शक्ति कमान द्वारा 13 जुलाई को जयपुर के झारखंड मोड़ के पास किया गया। राजस्थान के इस बहादुर सपूत के सम्मान में उन्हें श्रंद्धाजलि भी दी गयी।





जनरल सगत के जन्म शताब्दी (14 जुलाई) के समारोह के उपलक्ष्य में,  सेना ने राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और यूपी के विभिन्न स्कूलों में इस महान जनरल की उपलब्धियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए व्याख्यान आयोजित किये गए। लेफ्टिनेंट जनरल सगत ने सेना में सामान्य रैंक में भर्ती होने के बावजूद लेफ्टिनेंट जनरल का प्रतिष्ठित रैंक हासिल किया। साल 1961 में गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

साल 1967 में जब भारत और चीन के बीच नाथू ला (पास) में झड़प हुई, तब लेफ्टिनेंट जनरल सगत ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश के बावजूद नाथू ला पास को खाली करने से मना कर दिया था। जिसका परिणाम यह रहा कि नाथू ला अब भी हमारे कब्जे में है।

इसके बाद  साल 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान  लेफ्टिनेंट जनरल सगत 04 कोर कमांडर थे, जिसने बांग्लादेश की आजादी के दौरान ढाका पहुँच कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह पाकिस्तान सेना के जनरल नियाजी द्वारा विख्यात आत्मसमर्पण संधि पर हस्ताक्षर करने के दौरान उपस्थित भाग्यशाली लोगों में से एक थे।

जनरल अधिकारी ने अपना सेवानिवृत्त जीवन गरीब और वंचित ग्रामीणों की मदद और सामाजिक कार्यों मे समर्पित किया। 26 सितंबर, 2001 को उनका निधन हो गया। एक देशभक्त योद्धा लेफ्टिनेंट जनरल सगत भारतीय सेना के सैनिकों के लिए एक मिशाल हैं जिनके पद चिन्हों पर हर सैनिक चलना चाहेगा। सप्त शक्ति कमान उन्हें नमन करता है।

सेना ने राजस्थान के इस बहादुर बेटे की याद में 14 जुलाई (जन्म शताब्दी) को सप्त शक्ति सभागार में एक सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल सगत के बारे में अपने अनुभव और विचार प्रस्तुत किए ।

 

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