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भारी भीड़ ने बता दिया… नहीं डरते आतंकवादियों से

लेफ्टीनेंट उमर फैयाज

श्रीनगर। राजपूताना रायफल्स में 2016 में कमीशन प्राप्त लेफ्टीनेंट उमर फैयाज की मौत ने आतंकवादियों का घिनौना चेहरा सामने लाने के साथ उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने यह सन्देश भी दे दिया कि वे न आतंकियों के इस कृत्य के साथ हैं और न ही अब डरने वाले हैं। …और सेना ने भी अब अपना रुख सख्त कर लिया है। घाटी में तेजी से फैल रहे आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए आर्मी ने कॉर्डन एन्ड सर्च ऑपरेशन्स (कासो) लागू करने का निर्णय लिया है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कश्मीर में लेफ्टीनेंट उमर फैयाज को शादी समारोह से अगवा कर गोलियों से छलनी करने वाले गुनाहगार आतंकियों के पोस्टर जारी किए हैं।





कश्मीरियों में इस घटना को लेकर बेहद गुस्सा है जो वह सोशल मीडिया के जरिए निकाल भी रहे हैं। फैयाज का जनाजा जब उसके गाँव सुरसोना पहुंचा था तो वह सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी देखी गईं।

अपने माता-पिता के इकलौते बेटे 22 साल के फैयाज की दो बहनें हैं जो उत्तर-प्रदेश के देवबंद में दारुल-उलूम में पढ़ रही हैं। वह दक्षिण कश्मीर के कुलगाम से NDA में जाने वाला पहला युवक था। घटना के समय वह बाटपुरा में अपने मामा की लड़की की शादी में शामिल होने गए थे। उन्हें 9 मई को रात 10 बजे आतंकवादियों ने अगवा कर गोलियों से छलनी कर दिया था। छह महीने पहले सेना में कमीशन मिलने के बाद फैयाज ने यह पहली छुट्टी ली थी।

छुट्टियों से सम्बंधित दिशा-निर्देश अब सख्ती से लागू कराने का सेना का फैसला

सेना अफसर उमर की मौत के बाद सेना ने अब छुट्टियों से सम्बंधित दिशा-निर्देश अब सख्ती से लागू कराने का फैसला लिया है। कश्मीर में रहने वाले सभी अफसरों को कहा गया है कि छुट्टी पर जाने से पहले अपनी स्थानीय इकाई को अनिवार्य रूप से सूचित करें। ऐसा उनकी सुरक्षा के नजरिए से किया गया है। वैसे बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस भी हाल में एक एडवायजरी जारी कर अपने जवानों और अफसरों को कह चुकी है कि जब तक हालात ठीक न हो जाएं अपने घर न जाएं क्योंकि आतंकी घरों में घुसकर हमले कर रहे हैं।

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