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स्पेशल रिपोर्ट: स्पाइक मिसाइल का थलेसना ने किया सफल परीक्षण

स्पाइक मिसाइल का परीक्षण

नई दिल्ली। भारतीय थलसेना ने  इजराइल से हासिल स्पाइक एल-आर  टैंक नाशक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। गौरतलब है कि  इस्राइली मदद से भारत डाइनामिक्स को  8,000 स्पाइक मिसाइलों का उत्पादन  तकनीक हस्तांतरण के जरिये  2016 में सहमति दे दी गई थी लेकिन बाद में रक्षा मंत्रालय ने तय किया कि इस किस्म की टैंक नाशक मिसाइल के स्वदेशी उत्पादन के लिये स्वदेशी कार्यक्रम ही चलाया जाएगा।





लेकिन चूंकि थलसेना ने इस तरह की एंटी टैंक मिसाइळ की तुरंत जरुरत महसूस की इसलिये आपात खरीद के तहत सीमित संख्या में इनका आयात किया गया। स्पाइक मिसाइलों ने साल 2011 में निकाले गए टेंडर के जवाब में सौदा जीता था। लेकिन साल 2016 में इसे रद्द कर दिया गया था। पिछले तीन दशकों  से भारतीय थलसेना  अब तक दूसरी पीढी की पुरानी तकनीक वाली टैंक नाशक मिसाइलों  से काम चला रही थी। स्पाइक मिसाइल चौथी पीढ़ी की मिसाइल है। चार किलोमीटर दूर तक मार करने वाली एंटी टैंक स्पाइक मिसाइल दुनिया की 33 सेनाओं द्वारा इस्तेमाल की जाती है।

भारतीय रक्षा शोध एवं विकास संगठन ने सरकार को भरोसा दिलाया था कि उसकी नाग टैंक नाशक मिसाइल कामयाब हो चुकी है जिसे थलसेना हासिल  कर सकती है। लेकिन यहां थलसेना के सूत्रों ने बताया कि यह मिसाइल  वास्तविक उत्पादन से काफी दूर है। इसलिये आपात जरुरत के तहत थलसेना ने स्पाइक मिसाइल हासिल करने का फैसला किया।

स्पाइक मिसाइल रात या दिन कभी भी किसी टैंक को  निशाना लगा सकती है। थलसेना में शामिल करने और ट्रेनिंग देने के बाद पहली बार थलसेना ने इसके इस्तेमाल का वास्तविक परीक्षण किया। यहां थलसैनिक सूत्रों का कहना है कि स्पाइक मिसाइल पर भरोसा जाहिर करने के बाद थलसेना इसकी और संख्या में इस्तेमाल के लिये नये आयात आर्डर दे सकती है।

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