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Special Report: भारत ने किया निर्भय मिसाइल का सफल परीक्षण

निर्भया मिसाइल

नई  दिल्ली। एक हजार से 1,500 किलोमीटर दूर तक मार करने वाली निर्भय सबसोनिक क्रूज मिसाइल का भारतीय मिसाइल वैज्ञानिकों ने सोमवार को एक और सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल की खासियत यह है कि यह लक्ष्य को खोज कर निशाना बनाती है।  इसीलिये इसे लोआइटरिंग मिसाइल कहते हैं।





रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की अडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी द्वारा विकसित यह मिसाइल सतह से केवल कुछ मीटर ऊपर से ही उड़ती हुई दुश्मन के ठिकाने पर जा कर वार कर सकती है। यह मिसाइल सौ मीटर से चार किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ती हुई  अपने लक्ष्य तक पहुंचती है। इसी वजह से इसे दुश्मन के रेडार देख नहीं पाते। रेडार की नजरों से बचने की इस मिसाइल में विशेष क्षमता होती है। इस मिसाइल के दोनों और डैने लगे होते है।

इस मिसाइल को ब्रह्मोस मिसाइल की अगली पीढ़ी की मिसाइल के तौर पर सेना में शामिल करने का इरादा है। ब्रह्मोस की मारक दूरी फिलहाल अधिकतम 450 किलोमीटर ही है लेकिन निर्भय मिसाइल दुश्मन के इलाके में काफी भीतर जा कर किसी खास ठिकाने को पहचान कर नष्ट कर सकती है। यह मिसाइल कई तरह के समान लक्ष्यों में से एक को पहचान कर उस पर वार करने में सक्षम है।

यह मिसाइल आवाज की गति से कम पर उड़ती है इसलिये इसे सब सोनिक क्रूज मिसाइल कहते हैं। इस मिसाइल  का परीक्षण ओडिशा के एकीकृत परीक्षण स्थल (ITR) चांदीपुर से किया गया। निर्भय मिसाइल की यह छठी परीक्षण उड़ान थी। अब तक इसके सभी परीक्षण कामयाब रहे हैं। इसके परीक्षण के बारे में यहां रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस मिसाइल ने पहले सीधे आसमान की ओर उड़ान भरी और इसके बाद नीचे आ कर  जमीन के समानांतर उड़ान भरने लगी। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने समुद्री सतह से कुछ ऊपर  उड़ान भरने की क्षमता साबित की।

इसकी पूरी उड़ान के दौरान निर्भय मिसाइल पर इलेक्ट्रोआप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम, रेडार और ग्राउंड टेलीमीट्री सिस्टम्स के जरिये नजर रखी गई। इन प्रणालियों को समुद्र तट के पास तैनात किया गया था।

इस मिसाइल को सालिड रॉकेट बूस्टर से ऊर्जा मिलती है। इस मिसाइल को इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम से गाइडेंस मिलती है। इसमें रिंग लेजर गाइरोस्कोप लगा होता है।

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