Army

लेफ्टिनेंट उमर फैयाज के नाम पर स्कूल का नाम

उमर फैयाज

शोपियां। हाल ही में जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की आतंकवादियों द्वारा अपहरण के बाद हत्या कर दिए जाने के पश्चात उमर के सम्मान में भारतीय सेना ने शोपियां के एक स्कूल का नाम बदलकर उमर फैयाज के नाम पर रखने का फैसला किया है। इस स्कूल का नाम बदलकर ‘लेफ्टिनेंट उमर सद्भावना स्कूल’ रखा जाएगा। विक्टर फोर्स के जनरल आॅफिसर कमांडिंग जीओसी मेजर जनरल बीएस राजू ने उमर फैयाज के परिवार से मिलने के बाद ये घोषणा की।





उमर फैयाज का परिवार

विक्टर फोर्स के जनरल आॅफिसर कमांडिंग जीओसी मेजर जनरल बीएस राजू ने उमर फैयाज के परिवार से मुलाकात की

इसके अलावा उन्होंने उमर की दोनों बहनों को नौकरी का आश्वासन दिया तथा उनके परिवार को 75 लाख का चेक सौंपा। साथ ही राजपूताना राइफल्स की यूनिट ने भी एक लाख रुपये दिए हैं। राजपूताना राइफल्स में अखनूर सेक्टर में तैनात फैयाज पिछले दिनों छुट्टी लेकर अपने मामा की बेटी की शादी में शामिल होने बटपुरा (बेहिबाग) पहुंचे थे, जहां आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया था। अगली सुबह उनका गोलियों से छलनी शव हरमैन में मिला था। सेना के अनुसार उमर की हत्या एक ड्राई फ्रूट्स के बगीचे में ले जाकर की गई थी।

अपहरण के वक्त दुल्हन से कर रहा था बातें

सेना के मुताबिक आतंकियों ने उमर फैयाज का अपहरण उस समय किया, जब वह अपने मामा के घर पहुंचकर अपनी ममेरी बहन यानी दुल्हन से मिलने उसके कमरे में बैठा था। खबरों के अनुसार फैयाज के परिवार वालों ने पुलिस अथवा सेना को तुरंत सूचना नहीं दी। उन्होंने सोचा था कि आतंकवादी एक कश्मीरी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन जब अगली सुबह उमर का गोलियों से छलनी शव प्राप्त हुआ तो स्थानीय निवासियों की भावनाएं बुरी तरह आहत हुर्इं। उमर के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ दफनाया गया।

स्कूल में होनहार विद्यार्थी था उमर

कश्मीर के एक स्थानीय अखबार को दिए अपने बयान में फैयाज के रिश्तेदार मोहम्मद अशरफ ने बताया कि कुलगाम जिले के सुरसोन गांव में पले बढ़े फैयाज को वर्ष 2011 में कक्षा बारह में 96 प्रतिशत अंक हासिल हुए थे। उमर ने जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूलिंग की थी। फैयाज काफी प्रतिभाशाली विद्यार्थी था और हमेशा से ही खेलकूद का शौकीन था। वह अपनी दो बहनों में सबसे बड़ा और सबका लाड़ला था। वर्ष 2012 में गांव में चर्चा हुई कि उसने एनडीए की परीक्षा पास की है और फिर बेहिबाग में सैन्य कैंप में उसे बुलाया गया, जहां से उसे दिल्ली भेज दिया गया। तब किसी को भी उसके नौकरी के नेचर से एतराज नहीं था।

अशरफ के अनुसार फैयाज के मामा की चार बेटियां हैं जिनमें से एक की शादी थी और किसी को ये अंदाजा भी नहीं था कि हम मकबूल की बेटी की शादी के जश्न के बजाय फैयाज की मौत का शोक मनाएंगे।

Comments

Most Popular

To Top