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मणिपुर में सेना से जुड़े मसलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

सुप्रीम-कोर्ट, सेना

नई दिल्ली। मणिपुर में सेना के द्वारा मारे गए लोगों के मसले पर केंद्र सरकार द्वारा दायर क्युरेटिव पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 265 मामलों में एफआईआर दर्ज करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने संकेत दिया कि वह इन एनकाउंटर की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर सकती है। एसआईटी के लिए आज केंद्र सरकार ने अफसरों के नाम सुप्रीम कोर्ट को सौंपे।





इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई कि सुरक्षा बलों द्वारा एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले की जांच न करने में उन्होंने सेना का साथ दिया। उस नाबालिग से दुष्कर्म का सेना के दो जवानों पर आरोप है। कोर्ट ने पूछा कि क्या वर्दी में रेपिस्ट मौजूद हैं?

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 12 अप्रैल को मणिपुर में सेना द्वारा मारे गए लोगों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में संशोधन करने के लिए क्युरेटिव पिटीशन दायर की है। केंद्र का कहना है कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मसला है और इस फैसले से जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के हिस्सों में सेना का रोज ब रोज का काम प्रभावित हो रहा है।

आपको बता दें कि पिछले साल आठ जुलाई को मणिपुर में 2010 से 2012 के बीच सेना के जवानों द्वारा मारे गए लोगों के मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सेना किसी के साथ बदले की भावना के तहत कार्रवाई नहीं कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान मारे गए करीब डेढ़ हजार लोगों की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। आपको बता दें कि आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट के तहत सेना ने वर्ष 2010 से वर्ष 2012 के बीच करीब डेढ़ हजार से ज्यादा एनकाउंटर किए। इसी की जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

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