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एक बार फिर पंजाब को कमांड करेगा यह कैप्टन

कैप्टन-अमरिंदर-सिंह

नई दिल्ली। कभी सेना के कैप्टन रहे अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पंजाब की राजनीति के ‘कैप्टन’ वही हैं। पंजाब में कांग्रेस का परचम लहराने वाले महाराजा पटियाला कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजनीति का कद्दावर नेता माना जाता है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और अपनी भारी जीत के साथ उन्होंने यह साबित भी कर दिया है।





पंजाब में कांग्रेस पार्टी के मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के लिए आज का दिन दो मायनों में ख़ास है। एक तो उनकी पार्टी राज्‍य में कांग्रेस को बहुमत मिलना तय है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पटियाला से 51,000 वोट से जीत दर्ज की और उन्होंने अकाली दल उम्मीदवार जनरल जे. जे. सिंह को हराया। जबकि कैप्टन को लम्बी में अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने शिकस्त दी है। कैप्टन ने दो सीट से चुनाव लड़ा था। दूसरी यह कि कैप्‍टन आज 75 साल के हो गये, आज उनका जन्‍मदिन है। कांग्रेस को अगर राज्‍य में बड़ी जीत मिलती है, जैसा कि दिखा रहा है, तो यह उनके जन्‍मदिन का बड़ा तोहफा होगा।

कैप्‍टन अमरिंदर सिंह पंजाब विधानसभा के सदस्‍य हैं और पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री हैं। उनका जन्‍म 11 मार्च 1942 को पटियाला राजघराने में हुआ था। 26 फरवरी 2002 से 1 मार्च 2007 तक वह पंजाब के मुख्‍यमंत्री रहे। कैप्‍टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस पार्टी के सदस्‍य हैं। कैप्‍टन सिंह पटियाला के महाराज यदविंदर सिंह के पुत्र हैं, उनकी माता का नाम मोहिंदर कौर था।

वर्ष 1964 में उनका विवाह परनीत कौर से हुआ। दोनों का एक बेटा, रणिंदर सिंह और बेटी जय इंदर कौर है। परनीत कौर भी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं तथा मनमोहन सिंह की सरकार में वह विदेश राज्य मंत्री रह चुकी हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पटियाला सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा। जबकि अमरिंदर सिंह अमृतसर से सांसद हैं जहां उन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली को हराया था।

अमरिंदर सिंह के परिवार का सियासत से पुराना नाता रहा है। अमरिंदर सिंह ने ‘नेशनल डिफेंस एकेडमी’ और ‘इंडियन मिलिट्री एकेडमी’ में पढ़ाई के बाद 1963 में भारतीय सेना ज्वाइन कर ली हालांकि 1965 के शुरुआत में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पाकिस्तान से युद्ध शुरू होने की वजह से उन्होंने एक बार फिर सेना ज्वाइन की और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बतौर कैप्टन लड़े। युद्ध के बाद उन्होंने फिर से सेना छोड़ दी। कैप्टन को कांग्रेस में लेकर आए राजीव गांधी कांग्रेस में अमरिंदर सिंह की एंट्री पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कराई क्योंकि वे दोनों स्कूल के दोस्त थे। अमरिंदर सिंह पहली बार 1980 में लोकसभा चुनाव जीते।

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