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VIDEO : गुरमेहर कौर पर कमेन्ट करने से पहले उनकी पूरी बात तो सुनो…!

गुरमेहर-कौर

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और शहीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर के वीडियो और बयान को लेकर उठे विवाद का जिस तरह से राजनीतिकरण किया गया, उससे गुरमेहर तनाव और हताशा में हैं। गुरमेहर ने ‘रक्षक न्यूज’ से बातचीत के दौरान कहा कि उसकी असली लड़ाई सिर्फ अमन के लिए है और वह नहीं चाहती कि इस विवाद को और तूल दिया जाए। गुरमेहर अभी दिल्ली से बाहर हैं। गुरमेहर से बातचीत के बाद ‘रक्षक न्यूज’ ने इस मामले में सही तस्वीर सबके सामने रखने की कोशिश की है।





दरअसल, इस विवाद को तूल देने के लिए जिस एक पोस्टर को हथियार बनाया गया वह एक ऐसे वीडियो का हिस्सा था जिसको न तो पूरा देखा गया और न समझा गया। दरअसल गुरमेहर अपना निजी दर्द बयां करना चाहती थी और किया भी, वह भी सिलसिलेवार ढंग से लेकिन नकारात्मक राजनीति के धुरंधरों ने सन्दर्भ को दरकिनार कर सिर्फ एक पोस्टर को मुद्दा बना दिया और गुरमेहर को बेवजह कटघरे में खड़ा कर दिया।

पूरा वीडियो देखने के बाद पता चल पाएगा कि आखिर क्या कहना चाहती थीं गुरमेहर कौर

38 पोस्टर वाले इस वीडियो में गुरमेहर ने उस बच्ची के दर्द और हालात को सिलसिलेवार जोड़ा है। जो उसने खुद भोगे और एक ऐसी बच्ची के तौर पर जिसके पिता का साया तभी उठ गया था जब वह महज 2 साल की थी। हालांकि, भारत सरकार के मुताबिक उन्होंने एक बात गलत दिखाई है कि उनके पिता शहीद कैप्टन मनदीप सिंह करगिल युद्ध में शहीद हुए थे। उनके पिता करगिल युद्ध में नहीं बल्कि आतंकियों से लोहा लेते वक्त शहीद हुए थे।

गुरमेहर के एक पोस्टर जिसमें लिखा है ‘मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा’ को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। लेकिन उन्होंने साथ ही वीडियो में यह भी दर्शाया है कि कैसे पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ा जाता है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने दो विश्व युद्ध होने के बाद फ्रांस और जर्मनी की दोस्ती का जिक्र किया है। यह दोनों ही विश्व युद्ध में एक-दूसरे के विरोधी थे। गुरमेहर ने कहा है कि अगर फ्रांस-जर्मनी दोस्त बन सकते हैं, विकास के लिए जापान-अमेरिका हाथ मिला सकते हैं तो हम (भारत-पाकिस्तान) क्यों नहीं।

गुरमेहर ने यह भी दर्शाया है कि दोनों देशों के ज्यादातर लोग शांति चाहते हैं युद्ध नहीं। उन्होंने दोनों देशों के नेतृत्व की क्षमता पर सवाल खड़े करते हुए वीडियो में दिखाया है कि Third World लीडरशिप के साथ हम First World Country बनने का सपना नहीं देख सकते। उन्होंने दोनों देशों (भारत-पाकिस्तान) को बात-चीत करने और दोस्ती करने की भी सलाह दी है।

गुरमेहर ने गुस्सा भी जाहिर किया है। उन्होंने पोस्टर में प्रदर्शित किया कि State Sponsored आतंकवाद बहुत हो चुका, State Sponsored जासूसी बहुत हो चुकी, State Sponsored नफरत बहुत हो चुकी, सीमा के दोनों तरफ बहुत लोग मारे जा चुके हैं, बहुत मतलब बहुत…! मैं एक ऐसे संसार में जीना चाहती हूं, जहां ऐसी गुरमेहर कौर न हो जो अपने पिता के लिए तरसे। उन्होंने यह भी कहा है कि वह ही एक ऐसी नहीं हैं जो इस दर्द से गुजरी हैं उनके जैसे और भी लोग हैं जिन्हें ऐसे दर्द (युद्ध के दौरान पिता की मौत) से गुजरना पड़ा है।

दूसरे पोस्टरों में गुरमेहर ने मुस्लिमों और पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से का भी जिक्र किया है। उन्होंने दिखा है कि मुझे यह भी याद है कि मैं पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से नफरत करती थी, क्योंकि उन्होंने मेरे पिता की हत्या की। मैं मुसलमानों से भी नफरत करती थी, क्योंकि मैं सोचती थी कि सारे मुसलमान पाकिस्तानी हैं।

गुरमेहर ने यह भी दिखाया है कि जब मैं 6 साल की थी तब मैंने बुर्कानशीं एक महिला पर हमला करने की कोशिश की थी। क्योंकि किन्हीं अजीब कारणों से मैं सोचती थी कि वह भी मेरी पिता की मौत की जिम्मेदार है। मेरी मां ने मुझे रोका और मुझे समझाया कि मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा। उन्होंने आगे पोस्टरों में दिखाया कि मुझे कुछ समय लगा जानने में, लेकिन आज मैं नफरत दूर करना पूरी तरह सीख गई हूं।

गुरमेहर ने आगे के पोस्टरों में दिखाया है कि उनके लिए यह आसान नहीं था, लेकिन बहुत मुश्किल भी नहीं। अगर मैं ऐसा कर सकती हूं, तो आप भी कर सकते हो। खुद को सैनिक बताते हुए गुरमेहर ने पोस्टर में दर्शाया है कि आज मैं भी अपने पिता की तरह एक सैनिक हूं। मैं भारत और पाकिस्तान के बीच अमन के लिए लड़ती हूं। क्योंकि अगर हम दोनों (भारत-पाकिस्तान) के बीच युद्ध नहीं होता तो आज मेरे पिता होते मै ये वीडियो इसलिए बना रही हूं, क्योंकि मैं चाहती हूं कि दोनों देशों की सरकारें दिखावा बंद करें और समस्या सुलझाएं।

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