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पिपिंग सेरेमनी : नए सेना अफसरों ने सुनाई अपनी सफलता के पीछे की कहानी

आईएमए की पासिंग आउट परेड

देहरादून। शनिवार को इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA-आईएमए) की पासिंग आउट परेड (POP-पीओपी) के बाद आयोजित हुई पिपिंग सेरेमनी के संपन्न होने के साथ ही 490 जवान जेंटलमैन कैडट्स से सेना में अफसर बन गए। पीओपी में जहां इन कैडेट्स ने अफसर बनने की खुशी एक दूसरे से गले मिल और गीत गाकर मनाई वहीं बेस्ट कैडेट्स के तौर पर मेडल पाने वाले युवाओं ने अपनी सफलता और प्रेरणा के पीछे की कहानी बयां की।





  • गोल्ड मेडलिस्ट अविनाश क्षेत्री ने माता-पिता को दिया श्रेय
आईएमए की पासिंग आउट परेड

अविनाश क्षेत्री (फ़ाइल फोटो)

पासिंग आउट परेड में गोल्ड मेडल पाने वाले अविनाश क्षेत्री ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को दिया। अविनाश असम, तेजपुर के रहने वाले हैं और इनके पिता पुण्य बहादुर क्षेत्री पैरामिलिट्री फोर्स एसएसबी में अधिकारी हैं। अपने पिता से प्रेरणा लेकर सेना अधिकारी बनने के लिए अविनाश ने देहरादून के आर्मी स्कूल आरआईएमसी से स्कूली पढ़ाई की। अविनाश ने बताया कि देश सेवा करना उनका पहला लक्ष्य है।

  • सिल्वर मेडलिस्ट विकास ने दादा से ली प्रेरणा

वहीं, भिवानी हरियाणा के विकास सांगवान के पिता टेक्सटाइल इंडस्ट्री से ताल्लुक रखते हैं। विकास ने अपने दादा से देश सेवा की प्रेरणा ली। यही कारण रहा कि वह आज आर्मी अफसर बनने का अपना सपना पूरा कर पाए। उनके बुलंद हौसले ही थे जो आज पीओपी में उन्हें सिल्वर मेडल के सम्मान से नवाजा गया।

  • अक्षय सिंह बिष्ट आईएमए के ट्रेनर्स को दिया क्रेडिट

टेक्निकल सिल्वर मेडल इस बार उत्तराखंड के अक्षय सिंह बिष्ट के नाम रहा। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और आईएमए के ट्रेनर्स को दिया। अक्षय ने बताया कि आर्मी ऑफिसर बनने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद हर इंसान की पर्सनेलिटी चेंज हो जाती है। उनकी भी फिजिकल कैपेसिटी बेहतर हुई है। आर्मी में जाना बचपन का सपना था जो अब पूरा हो गया है।

  • कांस्य पदक विजेता रोहित ने पूरा किया मां का सपना

उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्र एंचोली, पिथौरागढ़ के रोहित जोशी के पिता एडी जोशी आर्मी में कर्नल पद पर हैं। पिता के साथ ही टीचर मां मधुबाला की प्रेरणा से रोहित का सपना था कि वह आर्मी में जाकर देश सेवा करें। बारकोट जीआईसी से स्कूली शिक्षा लेकर रोहित अपने सपने के सफर को पूरा करने निकल गए। एनडीए से सिलेक्शन हुआ और आईएमए के प्रशिक्षण ने उन्हें फौलाद बना दिया। देश सेवा के लिए रोहित ने ट्रेनिंग के दौरान कड़ी मेहनत की और कांस्य पदक जीता।

  • सबकी अपनी कहानी अपनी प्रेरणा
आईएमए की पासिंग आउट परेड

सैन्य अफसर बनने की खुशी

इस दौरान कैडेट्स ने अपनी खुशी को शब्दों में बयां किया। हरियाणा चरखी दादरी के विभोर सिहं ने कहा कि मेरा पिता भी आर्मी में रहकर देश को अपनी सेवा दे चुके हैं। मुझे भी अपने पिता की तरह आर्मी में काम करना था। इसलिए मैंने एनडीए क्वालीफाई किया और आज मेरा सपना भी पूरा हो गया है। अब मैं अपनी यूनिट में जाकर देश की सेवा का काम करुंगा। जबकि रोहित राणा (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) ने कहा, जब मैं स्कूल में पढ़ता था तब से ही आर्मी में जाने के सपने देखा करता था। मेरा पिता भी आर्मी में हैं। उनसे ही प्रेरणा लेकर मैं यहां तक पहुंचा हूं। मेरे यहां तक पहुंचने से मेरा पूरा परिवार खुश है।

  • ‘मेरा पिता किसान हैं’

वहीं, देवेंद्र अधिकारी ने बताया कि मेरा गांव डीडीहाट पिथौरागढ़ में है। मेरा पिता किसान हैं और अभी भी अपनी खेती से जुड़े हुए हैं। यहां से पहले पांच साल एयर फोर्स में काम किया है। वहां से कमीशन निकालने के बाद यहां ट्रेनिंग में शामिल हुआ। अब यहां पास आउट होने के बाद नई सोच के साथ काम करना है।

  • पिता की तरह मैं भी आर्मी में अधिकारी बनना चाहता हूँ

पिथौरागढ़ के रोहित बिष्ट ने कहा कि मेरा पिता आर्मी में कर्नल हैं और अपने पिता की तरह मैं भी आर्मी में अधिकारी बनना चाहता हूँ। मेरे इस सपने को पूरा करने के लिए मेरे माता-पिता दोनों ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया है। आज मेरा सपना पूरा होने से मुझसे ज्यादा मेरे माता-पिता खुश नजर आ रहे हैं।

  • लीक से हटकर कुछ करना था

नैनीताल के इंद्रेश पांडेय ने कहा कि मुझे लीक से हटकर कुछ करना था लेकिन मुझे कुछ ऐसा करना था जिससे मेरी फैमिली को मुझ पर नाज हो। मैं नैनीलाल के मल्लीताल का रहने वाला हूं। नैनीताल में ही मेरा बचपन गुजरा और यहीं से मैंने भी पढ़ाई की। अब मुझे देश सेवा का मौका मिला है। मैं इस मौके पर खरा उतरकर दिखाउंगा।

  • हमारे क्षेत्र में हर परिवार से फ़ौजी

जयदीप सिंह रावत (द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल) का कहना है कि मेरा गांव पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक में है। लेकिन मेरी पढ़ाई लखनऊ से हुई है। हमारे क्षेत्र में हर परिवार से कोई न कोई फौज में जरूर होता है। इसलिए मै भी आर्मी में जाना चाहता था। इसके लिए मैं पढ़ाई के साथ एनडीए की तैयारी भी करता रहा।

  • एयर फोर्स में मैंने आठ नौकरी की

हल्द्वानी के दीपक पांडेय ने बताया कि मैं आर्मी परिवार से हूं। मेरे पिता आर्मी से रिटायर्ड हो चुके हैं। इसलिए मैं भी आर्मी में जाना चाहता था। यहां से पहले मैं एयर फोर्स में था, एयर फोर्स में मैंने आठ साल नौकरी की है। वहां से कमीशन प्राप्त करने के बाद मैं यहां पहुंचा। अब मैं सिग्नल कोर में जाकर अपनी सेवाएं दूंगा।

  • देश सेवा में अपना जीवन न्योछावर करना मेरे लिए गौरव की बात होगी

पौड़ी गढ़वाल में बडोला के रहने वाले अंकितेश ने कहा कि हम अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य हैं जो सेना में शामिल हुए। दिल्ली के नेशनल विक्टर पब्लिक स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज से बीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद सीडीएस के माध्यम से आईएमए ज्वाइन किया। अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय पिता हरिकृष्ण बडोला और माता देवेश्वरी को दिया। उन्होंने कहा कि देश सेवा में अपना जीवन न्योछावर करना मेरे लिए गौरव की बात होगी।

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