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6 जून को ऐसा घमासान हुआ था गोल्डन टैम्पल में

ऑपरेशन ब्लू स्टार

नई दिल्ली। अमृतसर में हरमंदिर साहिब परिसर (गोल्डन टैम्पल) को आतंकवादियों से मुक्त कराने के मकसद से किया गया ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ असल में वो सैनिक कार्रवाई थी जिसके आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिए थे। ये ऑपरेशन सेना प्रमुख जनरल एएस वैद्य के नेतृत्व में तब किया गया जब पूरे पंजाब में आतंकवाद की वजह से कानून-व्यवस्था चरमरा चुकी थी। दुनिया भर में आतंकवादियों के गढ़ में किए गए आपरेशंस में ये सबसे बड़े आपरेशन के तौर पर माना जाता है। इसमें टैंक, तोप, बख्तरबंद वाहन, आंसू गैस के गोलों से लेकर हेलिकॉप्टर तक इस्तेमाल किए गए। ये ऑपरेशन तीन चरणों में बांटा गया।





ऑपरेशन-ब्लू-स्टार

अमृतसर में हरमंदिर साहिब परिसर में ऐसे की गई थी कार्रवाई

पहला हिस्सा था ऑपरेशन मेटल (Operation METAL) जो हरमंदिर साहिब परिसर तक सीमित रखा गया। दूसरा था ऑपरेशन शॉप (Operation Shop) जिसके तहत पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में आतंकवादियों और उनके साथियों की धरपकड़ की गई और तीसरा चरण जो बाद में किया गया वो था ऑपरेशन वुडरोज (Operation WOODROSE)। इसके तहत उन प्रदर्शनकारियों से निपटा गया जो सरेआम तलवारें लेकर सड़क पर निकल पड़ते थे।

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ऑपरेशन ब्लू स्टार

आतंकवादियों की सरपरस्ती यूं तो जरनैल सिंह भिंडरावाले की थी लेकिन उनका दाहिना हाथ मेजर जनरल शाहबेग सिंह थे। कहा जाता है कि इस ऑपरेशन की व्यूह रचना का जिम्मा पहले तो लेफ्टिनेंट जनरल (तत्कालीन) एस के सिन्हा को सौंपा गया लेकिन उनके मना कर देने पर जनरल एएस वैद्य को जिम्मेदारी सौंपी गई। पहले जनरल वैद्य को सेना प्रमुख बनाया गया और उनको इस ऑपरेशन में सेना के उप प्रमुख के तौर पर के. सुंदरजी ने मदद की। सुंदरजी भी बाद में आर्मी चीफ बनाए गए थे।

जनरल एएस वैद्य

आपरेशन ब्लू स्टार के बाद अमृतसर में जनरल एएस वैद्य

ऑपरेशन में 6 जून 1984 को सबसे अहम दिन माना जाता है। दस दिन के इस ऑपरेशन में 70 हजार से ज्यादा सुरक्षा बल इस्तेमाल किए गए और सुरक्षाकर्मियों, सैनिकों समेत लगभग 500 लोग मारे गए। मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर लगातार विवाद बना रहा। इस ऑपरेशन तहत कार्रवाई दस दिन ऐसी रही:

1 जून 1984 (पहला दिन):

सेना के आदेश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने गुरू राम दास लंगर घर की इमारत पर गोलियां दागीं । इसमें 8 से 10 लोग मारे गए।

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जब सेना के आदेश पर बरसाई गईं थीं गोलियां (फाइल फोटो)

2 जून 1984 (दूसरा दिन):

पंजाब, कश्मीर, राजस्थान से सटी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पूरी तरह सील कर दी गई। विदेशियों और NRI का आना भी रोक दिया गया। पंजाब में रेल, सड़क और हवाई यातायात बंद कर दिया गया। अमृतसर में बिजली पानी की सप्लाई भी ठप कर दी गई। जनरल गौरी शंकर को राज्यपाल का सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। मीडिया पर रोक लगा दी गई।

3 जून 1984 (तीसरा दिन):

पूरे राज्य में कर्फ्यू लगा दिया गया और हर जगह सेना और अर्ध सैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। हरमंदिर साहिब में आना जाना एकदम रोक दिया गया ।

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हरमंदिर साहिब में 3 जून से आने-जाने पर लगा दी गई थी पाबंदी

4 जून 1984 (चौथा दिन):

सेना ने ऐतिहासिक रामगढ़िया बूंगा, बेहद बड़े आकार की पानी की टंकी और तमाम जगहों पर की गई किलेबंदी को बम वर्षा से ध्वस्त किया। जनरल शाहबेग सिंह की खड़ी की गई सुरक्षा दीवार ध्वस्त करने के लिए सेना ने ऑरडनेंस QF-25 पाउंडर (ORDERNANCE QF- 25 POUNDER) तोप इस्तेमाल की गई। गुरुनानक निवास बिल्डिंग के पास रास्ते पर टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां तैनात की गईं। दोनों पक्षों के बीच घमासान हुआ और तकरीबन 100 लोग मारे गए। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व अध्यक्ष गुरचरण सिंह टोहरा को भिंडरावाले से बातचीत के लिए भेजा गया लेकिन वार्ता सफल नहीं हुई। दोबारा फायरिंग हुई।

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SGPC के पूर्व अध्यक्ष गुरचरण सिंह टोहरा को भिंडरावाले से बातचीत के लिए भेजा गया लेकिन वार्ता सफल नहीं हुई (फाइल फोटो)

5 जून 1984 (पांचवां दिन):

सुबह से ही हरमंदिर परिसर में गोले दागे जाने लगे। अकाल तख्त इमारत पर सामने से हमला करके घुसने की कोशिश की गई जो नाकाम रही। शाम को BSF और CRPF ने होटल गोल्डन टैम्पल व्यू और ब्रह्मबूटा अखाड़े पर हमला किया और 3 घंटे में कब्जे में ले लिया।

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गुरुनानक निवास बिल्डिंग के पास रास्ते पर टैंक और बाजार बंद गाड़ियां तैनात की गई (फाइल फोटो)

इसके बाद सबसे शक्तिशाली और तीन तरफा हमला किया गया। ये हमला सुबह 7:30 बजे तक चलता रहा। इसमें पैरा कमांडो, स्पेशल फ्रंटियर फोर्स, 9 कुमाऊँ बटालियन, 26 मद्रास, 12 बिहार, 9 गढ़वाल, 15 कुमाऊं, एंटी टैंक RPG का इस्तेमाल हुआ।

6 जून (छठा दिन) :

विजयंत टैंक से अकाल तख्त पर गोले दागे गए। इमारत को काफी नुकसान हुआ लेकिन इसका ढांचा सलामत रहा। यहां से आतंकवादियों के एक ग्रुप ने बच के निकल भागना चाहा तो मशीनगन से उन्हें धराशायी कर दिया गया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार

ऑपरेशन ब्लू स्टार में टैंकों का भी हुआ इस्तेमाल

7 जून (सातवां दिन) :

सेना ने हरमंदिर साहिब को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। पुलिस अधिकारियों को सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में भेजा गया। गुरु ग्रन्थ साहिब की प्रतिलिपियां, दसों गुरुओं की हस्तलिपियां और धार्मिक पुस्तकें इकट्ठा की गई ।

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सेना ने 7 जून को हरमंदिर साहिब की पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया था (फाइल फोटो)

8 से 10 जून (तीन दिन):

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टावर के बेसमेंट में छिपे थे आतंकियों के गुट (फाइल फोटो)

एक टावर के बेसमेंट में छिपे आतंकियों के गुट से संघर्ष के दौरान गोलीबारी चलती रही। इस दौरान कमांडो दस्ते के एक कर्नल की मशीनगन की फायरिंग में मौत हुई। सेना ने आक्रमण तेज किया और दस तारीख की दोपहर ये ऑपरेशन खत्म हुआ।

ऑपरेशन के बाद

ऑपरेशन का बदला लेने की गरज से प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उन्हीं के सुरक्षाकर्मियों ने छह महीने बाद गोलियां बरसा कर मार डाला। जनरल एएस वैद्य की आतंकवादी सुखजिंदर सिंह सुक्खा और हरजिंदर सिंह जिंदा ने पुणे में 10 अगस्त 1986 को हत्या कर दी।

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