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VIDEO: खाने की क्वालिटी और गुलामों जैसे बर्ताव पर अब इस जवान ने खोली जुबान

सिंधव-जोगीदास

नई दिल्ली। बीएसएफ जवान तेज बहादुर के मामले की जांच चल रही है और सैनिक रॉय मैथ्यू की मौत की गुत्थी अभी सुलझी भी नहीं थी कि एक और जवान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बार विरोध की आवाज आर्मी मेडिकल कोर यूनिट के जवान सिंधव जोगीदास ने उठाई है। जोगीदास ने भी वीडियो में खराब क्वालिटी और अफसरों के खराब बर्ताव की शिकायत की है। उसके मुताबिक, ‘हर जवान यही चाहता है कि मेरे देश की सेना की इज्जत सबसे ऊपर हो। लेकिन ये कब तक सहते रहेंगे। अब बात सिर्फ सहायक तक सीमित नहीं रही, बहुत कुछ गलत हो रहा है। जवानों को सिर्फ दिखावे के लिए सुविधाएं दी जाती हैं। बहुत सारी यूनिटों में खाना दिया जाता है तो सिर्फ जिंदा रखने के लिए। सबसे सस्ती सब्जी, सबसे सस्ता फ्रूट, सबसे घटिया खाना दिया जाता है।’





अफसर समझते हैं गुलाम !

जोगीदास के आरोप यहीं खत्म नहीं होते। उन्होंने वीडियो में दावा किया है कि सेना के कुछ अफसरों ने जवानों को गुलाम समझ रखा है। जवानों को सब कुछ मजबूरी में करना पड़ता है और जो मुंह खोलता है, मारा जाता है।’ जोगीदास की मानें तो छुट्टी खत्म होने के 2 दिन बाद ड्यूटी ज्वाइन करने पर उन्हें सहायक का काम करने की सजा दी गई। जब उन्होंने सजा को स्वीकार करने से इनकार किया तो उन्हें 7 दिन सेना की हिरासत में भेज दिया गया। मैं पहले से ही 2014 में इस सहायक ड्यूटी को कर चुका था इसलिए मैंने मना कर दिया। तब तो मुझे कुछ नहीं कहा गया लेकिन बाद में मेरा शोषण किया गया।

किसी ने नहीं सुनी फरियाद

सिंधव जोगीदास का दावा है कि वह PMO, रक्षा मंत्री और सेनाध्यक्ष बिपिन रावत तक भी अपनी बात पहुंचा चुके हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। प्रधानमंत्री दफ्तर को खत लिखने के बदले उनके खिलाफ जांच बिठा दी गई।

जवान सिंधव जोगीदास ने कब-कब की शिकायतें

  • PMO में 21 जनवरी 2016 और 28 अक्टूबर 2016 को शिकायत की
  • 21 जनवरी 2016 को रक्षा मंत्री कार्यालय में शिकायत की
  • 18 जनवरी 2017 को छुट्टी लेकर सेना भवन गया लेकिन वहां मुझे घुसने ही नहीं दिया गया
  • सेनाध्यक्ष बिपिन रावत को पत्र लिखा लेकिन कोई जवाब नहीं आया

दूसरी तरफ, सेना के सूत्रों की मानें तो सिंधव जोगीदास को पिछले साल अनुशासनहीनता के आरोप में कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक जोगीदास कई बार अफसरों की नाफरमानी कर चुका है और ये वीडियो महज सेना की किरकिरी के मकसद से पोस्ट किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सहायक व्यवस्था से उसका कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि बतौर सिपाही हाउसकीपर साफ-सफाई उसकी ड्यूटी का हिस्सा है।

जोगीदास से जुड़े कुछ विवाद

साल 2015 में जोगीदास को छुट्टी से ज्यादा वक्त घर में बिताने पर सजा मिली थी। इसके बाद उसने नौकरी छोड़ने की ख्वाहिश जाहिर की थी। लेकिन काउंसिलिंग के बाद उसने अपना इरादा छोड़ दिया। इसके बाद उसे रानीखेत ट्रांसफर कर दिया गया। यहां भी उसने ड्यूटी करने से इनकार किया तो उसे 7 दिनों तक आर्मी की जेल में रखा गया।

सेना के सूत्रों मुताबिक, PMO को खत लिखने के बाद जोगीदास के आरोपों की जांच की गई थी। लेकिन उसके आरोपों में सच्चाई नहीं पाई गई। 28 फरवरी से उसका तबादला लेह में कर दिया गया था, मगर उसने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की।

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