Army

सड़कों पर जांच के वक्त ही लगेंगे बैरिकेड, दुर्घटना हुई तो नपेंगे अधिकारी : दिल्ली पुलिस आयुक्त

नई दिल्ली। शहर में यातायात को व्यवस्थित करने और वाहनों की जांच के लिए पुलिस बैरिकेड का इस्तेमाल करती है लेकिन कई बार गलत तरीके से बैरिकेड लगाने के कारण दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। पुलिस की इस लापरवाही को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने बैरिकेड लगाने के सही तौर-तरीकों के बारे में दिशा निर्देश जारी किये हैं।





एक दैनिक अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार इस एडवाइजरी  निर्देश दिए गए हैं कि मुताबिक सड़कों पर जांच के वक्त ही बैरिकेड लगाए जाएं। पुलिस आयुक्त ने कहा है कि अगर कहीं भी गलत तरीके से बैरिकेड लगाने की वजह से कोई दुर्घटना होती है तो जांच में शामिल पुलिसकर्मियों के अलावा संबंधित इलाके के थानाध्यक्ष, ट्रैफिक इंस्पेक्टर व जोनल अफसर (जेडओ) इसके लिए जिम्मेदार होंगे।

थाने में दर्ज करना होगा बैरिकेड  संबंधित ब्यौरा 

जांच के बाद  पुलिसकर्मियों द्वारा बैरिकेड हटाएं जाने की सूचना संबंधित थाने में रोजनामचा में दर्ज करानी होगी। जहां रजिस्टर में व्यवस्था का ब्योरा भी लिखना होगा यानी यह भी लिखना होगा कि जांच के दौरान कोई दुर्घटना नहीं घटी अथवा जाम नहीं लगा। पुलिस आयुक्त ने कहा है कि बैरिकेड पर तैनात पुलिसकर्मियों की ड्यूटी आठ घंटे तक लगाई जाती है। लेकिन इतनी देर तक खड़े होकर जांच करना मुश्किल है। संबंधित अधिकारी चाहें तो कर्मियों की ड्यूटी का समय कम कर सकते हैं।

दिल्ली पुलिस में पटनायक पहले ऐसे आयुक्त हैं, जिन्होंने बैरिकेड को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पटनायक ने कहा है कि सभी जिलों के बैरिकेड अलग-अलग होंगे जिन पर जिले व थाने का नाम लिखा होगा। बैरिकेड पर सीरियल नंबर होना जरूरी है। इसके अलावा बैरिकेड पर किसी निजी कम्पनी के विज्ञापन न हों यदि किसी बैरिकेड पर विज्ञापन है तो उसे हटा दिया जाए।

उन्होंने कहा है कि जांच में थानाध्यक्ष व एडिशनल SHO को भी हिस्सा लेना चाहिए। इससे पुलिसकर्मियों का हौसला बढ़ेगा। जिले के डीसीपी से कहा गया है कि वे नियमित रूप से अपने-अपने जिले में औचक निरीक्षण कर पता करें कि पुलिसकर्मी तय नियम का पालन करते हुए जांच कर रहे हैं अथवा नहीं।

ताकि चालकों को रात में साफ़ दिखें बैरिकेड

रात के समय जांच के दौरान बैरिकेड पर फ्लोरिसिंग पेंट होना चाहिए। इसके अलावा रिफ्लेक्टिव टेप व ब्लींकर होना चाहिए, ताकि दूर से ही वाहन चालकों को बैरिकेड दिख जाए। रात के समय जांच करने वाले सभी पुलिसकर्मी फ्लोरिसेंट जैकेट पहनकर रहेंगे। कहीं भी बैरिकेड लगाने से पहले इलाके के एसीपी से अनुमति लेनी होगी। आयुक्त ने कहा है कि जो खराब बैरिकेड हैं उन्हें संबंधित विभाग में जमा करवा दें।

रक्षक की राय : दिल्ली पुलिस के प्रमुख द्वारा बैरिकेड लगाने के तौर-तरीकों पर विस्तार से दी गई जानकारी बड़ी काम की है और संबंधित पुलिसकर्मी यदि इसका अक्षरशः पालन करेंगे तो इससे होने वाली दुर्घटनाओं में तो कमी आएगी ही पुलिस की छवि भी बदलेगी।ऐसा ही अन्य राज्यों की पुलिस को भी करना चाहिए ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

Comments

Most Popular

To Top