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पत्थरबाजों से निबटने के लिए प्लास्टिक बुलेट की खेप भेजी गई कश्मीर

नई दिल्ली:पैलेट गन से होने वाली क्षति को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्लास्टिक बुलेट की खेप कश्मीर घाटी में भेजी हैं और सुरक्षाबलों को आदेश भी दिया गया है कि वे भीड़ को काबू में करने के लिए पैलेट गन की जगह अब प्लास्टिक बुलेट (गोली) का इस्तेमाल करें।





गृह मंत्रालय की ओर से सुरक्षाबलों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर हालात ज्यादा बिगड़ जाएं तो पैलेट गन का इस्तेमाल केवल आखिरी विकल्प के तौर पर ही किया जाए। यह प्लास्टिक बुलेट आईएनएसएएस (इंसास) रायफल्स से फायर किया जा सकेगा और शरीर पर इससे छेद नहीं होगा।

प्लास्टिक बुलेट भी कम नहीं

प्लास्टिक बुलेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पैलेट गन के विकल्प में आई प्लास्टिक बुलेट कम खतरनाक नहीं है। यह भी वही काम करेगी जो आम बुलेट करती है। लेकिन इस बात को नहीं नकारा जा सकता कि इससे किसी की मौत नहीं होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर प्लास्टिक बुलेट भी शरीर के संवेदनशील हिस्से में लगे तो इंसान की जान जा सकती है। यानि, अगर वह इंसान के सिर में सीधे जाकर लगती है या ऐसे ही किसी शरीर के भाग में तो भी इंसान की मौत संभव है।

वहीं, पैलेट गन के छर्रे फैल जाते हैं और शरीर के विभिन्न भागों में घुस जाते हैं, जिससे इंसान मरता तो नहीं है लेकिन उसके बाद उसे काफी पीड़ा होती है और काफी समय तक इलाज कराना पड़ता है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दिए थे पैलेट गन के विकल्प के संकेत

पैलेट गन का शिकार एक व्यक्ति

पिछले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह उग्र प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए जल्द ही एक सीक्रेट वेपन का इस्तेमाल शुरू करने वाली है। केंद्र सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल के पीछे दलील दी थी कि कश्मीर में प्रदर्शनकारियों के प्रदर्शन पर बदबूदार पानी, लेज़र डेज़लर का भी प्रदर्शनकारियों पर कोई असर नहीं होता है, तब आखिरी विकल्प के तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है।

गौरतलब है कि पैलेट गन को लेकर याचिककर्ता ने कोर्ट में कहा था कि कोई सरकार अपने लोगों को मारने, अंधा या अपाहिज करने की इजाजत नहीं दे सकती है। क्योंकि पैलेट गन की मार से लोग लंगड़े-लूले हो रहे हैं। आखिर सरकार इसकी इजाजत कैसे दे सकती है। जिसके बाद कोर्ट ने याचिककर्ता से दो हफ़्ते के अंदर हलफनामे के जरिए वे सुझाव मांगे हैं, जिनके जरिए इस हालात पर काबू पाया जा सकता है।

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