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गजब का जज्बा! करगिल शहीद की बेटी ने भी पहनी सेना की वर्दी

नई दिल्ली: उनके पति करगिल युद्ध में शहीद हो गए और वह मात्र 21 साल की उम्र में विधवा हो गई। उनके कंधों पर तीन बच्चों की जिम्मेदारी आन पड़ी। इनमें सबसे बड़ी बेटी की उम्र महज 6 साल थी। लेकिन इस महिला ने हिम्मत नहीं हारी और आज उनकी बड़ी बेटी सेना में अफसर बन गई है।





यह कहानी है करगिल युद्ध में शहीद हुए कुमाऊं रेजिमेंट के लांस नायक इंदर राणा की पत्नी बिमला की। पति की शहादत के बाद उन पर दो बेटियों और एक बेटे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी। उनके ऊपर पहले से ही दुखों का पहाड़ टूटा हुआ था लेकिन दुख उस समय और ज्यादा हो गया जब पारिवारिक हालात बदल गए और उन्हें रानीखेत स्थित रेजिमेंटल सेंटर में युद्ध विधवाओं के लिए चलाए जा रहे हॉस्टल में रहना पड़ा।

बेटी की जिद और बिमला की मेहनत

बिमला राणा ने हॉस्टल में रहकर नई जिंदगी के लिए खुद को तैयार करने का फैसला किया। वह बड़ी बेटी मीनाक्षी को रानीखेत में सरकारी स्कूल भेजने लगीं। इस हिंदी मीडियम के स्कूल में पढ़ते हुए मीनाक्षी हमेशा कहा करती थी, ‘मैं फौज में जाऊंगा, मैं फौजी बनूंगा’। बेटी मीनाक्षी की इस बात का बिमला पर काफी प्रभाव पड़ा। वह मीनाक्षी को उनके पति के पद पर देखने की कल्पना करने लगीं, लेकिन यही लगता था कि मीनाक्षी तो लड़की है, वह सेना में कैसे जाएगी।

सेना की वर्दी में अपनी मां बिमला के साथ मीनाक्षी

वुमन एंट्री स्कीम ने दिखाई राह

एक दिन वीर नारियों के सम्मेलन में पहुंची बिमला को वुमन एंट्री स्कीम के बारे में पता चला। इसके साथ उन्हें यह भी जानकारी मिली कि इसके लिए मीनाक्षी को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ना होगा। अब उन्हें बेटी के इंग्लिश मीडियम स्कूल के खर्चे को लेकर चिंता सताने लगी। बहरहाल, मीनाक्षी पढ़ने में प्रतिभाशाली थीं, इसलिए उन्हें रानीखेत में ही अशोक हॉल गर्ल्स आवासीय स्कूल में एडमिशन मिल गया। बिमला ने भी मीनाक्षी को निराश नहीं होने दिया।

मीनाक्षी ने भी मां को नहीं होने दिया निराश

90 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं करने के बाद मीनाक्षी दिल्ली आईं। यहां उन्हें एसआरसीसी में एडमिशन मिला। बीकॉम ऑनर्स करने के बाद उन्होंने वुमन एंट्री स्कीम के तहत अप्लाई किया और पहली बार में ही इसमें सफल रहीं।

चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से कमीशन पूरा करने के बाद उन्हें सेना की आयुध कोर में शामिल होने का मौका मिला। बिमला राणा कहती हैं कि आज इंफेन्ट्री में महिलाओं को मौका मिले तो मैं बेटी को कुमाऊं रेजिमेंट में ही भेजना चाहूंगी, जिसमें मेरे पति हुआ करते थे।

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