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शहीद हनुमनथप्पा वह जांबाज जिसने मौत को भी दी थी मात, जानें 7 खास बातें

वह उन जांबाजों में से हैं जो केवल देश के लिए ही जन्म लेते हैं और वीरगति प्राप्त कर देश की मिट्टी में ही मिल जाते हैं। जी, हम बात कर रहे हैं शहीद लांस नायक हनुमनथप्पा कप्पोड़ की, जो 3 फरवरी, 2016 को 9 जांबाजों के साथ दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र सियाचिन में हिमस्खलन के दौरान 30 फीट तक अंदर धंस गए थे और सभी सैनिक शहीद हो गए थे। लेकिन 6 दिन बाद जब हनुमनथप्पा को बर्फ से निकाला गया तो उनकी सांसें चल रही थीं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उनकी यह लड़ाई खुद में एक चुनौती थी। लेकिन सेना के इस जांबाज को लाख कोशिशों के बाद भी बचाया नहीं जा सका और 11 फरवरी, 2016 की सुबह दिल्ली के एक सैन्य अस्पताल में हनुमनथप्पा ने अंतिम सांस ली। आइये जानते हैं इस जांबाज से जुड़ी कुछ खास बातें-





6 किलोमीटर दूर जाते थे स्कूल हनुमनथप्पा

शहीद हनुमनथप्पा

हनुमनथप्पा कोप्पाड़ का जन्म 1 जून, 1983 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले के बेतादुर गांव में हुआ था। स्कूली पढ़ाई के लिए उन्हें घर से 6 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता था। टेड़े-मेड़े रास्ते इस बालक की पढ़ाई में बाधा नहीं बने।

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