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न बांधता जीप से तो जातीं कई जानें : मेजर गोगोई

मेजर नितिन लीतुल गोगोई

श्रीनगर। पिछले दिनों पत्थरबाजों से निपटने के लिए स्थानीय कश्मीरी युवक को आर्मी की जीप के बोनट पर बांधने को लेकर काफी खबरें आती रहीं। लेकिन पूरी घटना क्या थी कोई न नहीं जानता। कश्मीरी युवक को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने वाले भारतीय सेना की 55 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर नितिन लीतुल गोगोई ने इस घटना पर आखिरकार चुप्पी तोड़ी है।





पथराव के दौरान दो मतदान केंद्रो पर फंसे थे लोग 

गोगोई के मुताबिक उन्होंने ये कदम उठाकर कई लोगों की जान बचाई। यदि वह ऐसा नहीं करते तो और बेहद हिंसक हो चुकी भीड़ पर फायरिंग कराते तो 12 लोगों की मौत हो जाती। गोगोई ने कहा कि ये घटना 9 अप्रैल को घटी जब बडगाम में उपचुनाव हो रहे थे। चुनाव के दौरान सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस और अन्य सिक्युरिटी फोर्सेज से कॉर्डिनेट कर रहे थे। सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर सूचना मिली कि गुंडीपुरा के पास भीड़ बाहर बुरी तरह पथराव कर रही है और कुछ पोलिंग आफिसर्स और सुरक्षाकर्मी पोलिंग स्टेशन में फंस गए हैं, इस सूचना पर क्विक रिएक्शन टीम के साथ निकले, रास्ते में कई रोड ब्लॉक मिले जिन्हें साफ करते हुए वे 30 मिनट बाद मौके पर पहुंच पाए। वहां हालात थोड़े काबू हुए और पोलिंग स्टेशन में लोगों को सुरक्षित किया।

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पत्थरबाज

इसी पत्थरबाज को सेना ने बांधा था जीप से तमाम लोगों की जान बचाने के लिए

हम गाड़ियों को आगे भी नहीं बढ़ा पा रहे थे

यहां पर उन्हें एक अन्य सूचना मिली उतलीग्राम में हालात बिगड़ रहे थे। यहां भी वही हाल था बच्चे और महिलाएं भी भीड़ पर पथराव कर रहे थे। हम अपनी गाड़ियों से निकलने में असमर्थ थे और आगे नहीं जा पा रहे थे। लाउडस्पीकर्स पर लगातार बोल रहे थे कि वे बस पोलिंग अफसरों को लेने आए हैं लेकिन कोई उनकी बात नहीं सुन रहा था। यहां उन्हें खुद से एक करीब 30 मीटर की दूरी पर एक युवक दिखा जो पथराव भी कर रहा था और भीड़ को उकसा रहा था। गोगोई ने टीम से उस युवक को पकड़ने के लिए कहा। युवक ने बाइक पर सवार होकर भागने की कोशिश की लेकिन टीम ने उसे पकड़ लिया। पकड़ा गया युवक फारुख अहमद डार था जिसे जीप से बांधा गया। ऐसा करके वह मतदान केंद्र की तरफ बढ़ने लगे जहां कई सुरक्षाकर्मी फंसे थे। भीड़ उस समय और भी हिंसक हो गई थी और पथराव और भी तेज हो गया। भीड़ ने उन पर पेट्रोल बम भी फेंका जो फटने से बच गया।

जब भीड़ नहीं रुकी तो ये खयाल आय

गोगोई ने कहा कि ऐलान करने के बावजूद भीड़ ने जब उनकी बात नहीं सुनी तो उन्हें ये खयाल आया। युवक को जीप पर बांधने पर पत्थरबाजी रुक गई और उन्हें सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षित बचाने का मौका मिल गया। गोगोई ने कहा कि उनका मकसद सिर्फ लोगों को बचाने का था। मौके पर 1200 से भी ज्यादा की भीड़ थी यदि वह फायरिंग का आदेश देते तो 12 लोग मारे जाते। गोगोई ने जय हिंद बोलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर दी।

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