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मेजर डेविड मनलुन : बस NSG ज्वाइन करना था लेकिन…

नगालैंड एनकाउंटर

शिलांग। मेजर डेविड मनलुन (Major David Manlun) मणिपुर के जिस चूराचांदपुर के रहने वाले थे, वहां से भारतीय फौज में कमीशंड ऑफिसर के रूप में शामिल होने वाले वह चंद लोगों में से एक थे। फौजी पिता की संतान डेविड की जांबाजी की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। आज शिलांग में मेजर डेविड को अश्रुपूर्ण विदाई दी गई। उनका पार्थिव शरीर हवाई जहाज से यहाँ लाया गया। यहीं उनके माता-पिता रहते हैं। उन्हें पूरे सैनिक सम्मान से विदाई दी गई। उनसे जुड़ी ख़ास बातें आज हर किसी को जरूर जाननी चाहिए।





  • NSG में शामिल होने के लिए शारीरिक व मानसिक तौर पर तपे-तपाए अधिकारी व जवान ही लिए जाते हैं। मेजर डेविड में ये सब था। तभी तो वह NSG में शामिल होने वाले थे। उनका कॉल लेटर भी आ गया था, ऐसा वीर अधिकारी मंगलवार की आधी रात को उग्रवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहादत को प्राप्त हुआ।
नगालैंड में जांबाज मेजर शहीद, असम राइफल्स ने मार गिराए 4 उग्रवादी

सेना में अधिकारी बनने के लिए की कड़ी मेहनत

Major David Manlun martyred

मेजर मनलुन का जन्म 27 जुलाई 1985 को हुआ था। उनके एक करीबी दोस्त के मुताबिक वह बहुत लंबे समय से ही भारतीय सेना का अधिकारी बनना चाहता था और अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए काफी मेहनत की थी।

पिता का अनुसरण कर प्राप्त किया लक्ष्य

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मनलुन के पिता सूबेदार (सेवानिवृत्त) खामजालाम 5वीं असम रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मेजर डेविड ने शिलांग (मेघालय) के एंथोनी स्कूल से पढाई की थी और ग्रेजुएशन एंथोनी कालेज से पूरी की।

भाई से कहा था जूते तैयार रखना

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हथियारों का खिलाड़ी : मेजर डेविड मनलुन (फाइल फोटो)

उनके भाई के अनुसार मनलुन को हाल ही में NSG कमांडो में शामिल होने के लिए कॉल लैटर मिला था। वे NSG ज्वाइन करने से कुछ दिन पूर्व ही घर आने वाले थे, ‘मैंने उनसे मंगलवार शाम तक फोन पर चैटिंग की थी। उन्होंने अपने जूते व अन्य डॉक्युमेंट तैयार रखने को कहा था, क्योंकि उन्हें 15 जून को NSG को रिपोर्ट करना था।’

अगले माह था जन्मदिन, गिटार बजाने का बहुत शौक था

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उनके एक अन्य दोस्त ने कहा कि मनलून अगले माह 32 साल का होने वाला था। एक सैन्य अधिकारी का बेटा हमेशा ही अपने पिता की तरह ही सेना में शामिल होना चाहता था। उन्होंने भारतीय सेना में ज्वाइन करने के लिए अपने पिता का अनुसरण किया और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। वह ‘2 नागा बटालियन’ में थे और ‘164 टेरिटोरियल आर्मी’ में तैनात थे। मेजर मनलुन को गिटार बजाने का बहुत शौक था।

NCC यूनिट के भी रहे कमांडर

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मेजर डेविड मनलुन परिवार के साथ (फाइल फोटो )

मेजर डेविड के एक अन्य स्कूल दोस्त ने शोक जताते हुए कहा, अपना सर्वोच्च बलिदान करने से पहले 4 उल्फा आतंकियों को मार गिराया। उन्होंने स्कूल में NCC यूनिट की कमान संभाली थी। हमें याद है कि हम अपने शहर में एक साथ बड़े हुए हैं। मेजर डेविड की मौत के बाद शिलांग शहर में शोक की लहर है। एक जांबाज युवा भारतीय सेना के अधिकारी का जाना एक व्यक्तिगत नुकसान है, जो पूरे इलाके और उस समुदाय का हिस्सा थे।

बेटे की शहादत पर पिता को है गर्व

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शहीद मेजर डेविड मनलुन को सम्मान देते अफसर

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शहीद हुए मेजर डेविड मनलुन का अंतिम दर्शन को उमड़ा शिलांग

मेजर डेविड मनलुन का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके पैतृक स्थान पर पहुंचाया गया। उनकी इस शहादत पर उनके पिता ने कहा कि ईश्वर ने मुझे एक अच्छा पुत्र दिया, उसने बहादुरी से अपना कर्तव्य निभाया। ईश्वर ने उसे बुला लिया मुझे गर्व है कि उसने अपना सर्वश्रेष्ठ बलिदान दिया, मैं चाहता हूँ कि अन्य युवा भी सेना में भर्ती हों और बलिदान के लिए तैयार रहें, ताकि देश में अमन चैन बना रहे।

भारतीय सेना में परिवार के अन्य सदस्य भी

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शहीद मेजर डेविड मनलुन का पार्थिव शरीर जब उनके घर लाया गया

उनके पिता सूबेदार (सेवानिवृत्त) खामजालाम के अलावा एक भाई 8वीं असम रेजमेंट में जम्मू में तैनात हैं। वहीं उनकी बहन का विवाह सेना के 5वीं असम रेजिमेंट के ले. कर्नल आशुतोष से हुआ है। शहीद मेजर का पालन-पोषण मेघालय की राजधानी शिलांग के हैप्पी वैली इलाके में हुआ। वे मूलतः कुकी जनजाति के बताए गए हैं।

नगालैंड मुठभेड़ में ढेर आतंकियों की शिनाख्त हुई

दूसरी तरफ कोहिमा से मिली खबर के मुताबिक़ नगालैंड के मोन जिला अंतर्गत तिजित सब-डिवीजन के ओटिंग कस्बे के आसपास सेना के साथ हुए मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों की सुरक्षाबलों ने शिनाख्त कर ली है। मारे गए आतंकियों की पहचान प्रतिबंधित संगठन उल्फा स्वाधीन के कैडरों के रूप में की गई है। आतंकियों की पहचान बिपुल असम उर्फ अकोनी बैश्य (नामतोला, असम), डिकोम कोंवर (काकोतीबारी, असम) और फनींद्र असम उर्फ पंकज मोलिया (मथुरापुर, असम) के रूप में की गई है।

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