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भारतीय सेना के लिए वज्र तोपों का रास्ता साफ

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नई दिल्ली। सेना के लिए अहम वज्र तोप प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। पाकिस्तान से लगी सीमा पर रक्षा तैयारियों के मद्देनजर वज्र तोप सेना के लिए महत्वपूर्ण है। यह ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम के तहत बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसमें पहली बार कोई भारतीय कम्पनी तोप बनाएगी। हालांकि इसमें कोरियाई कंपनी का तकनीकी सहयोग होगा, पर आधा कंटेंट स्वदेशी होने की बात कही गई है। तोपें भारत में ही कम लागत पर सपोर्ट सिस्टम के जरिए उपलब्ध होंगी।





के-9 वज्र टी स्वचालित तोप बनाने के लिए भारतीय कम्पनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनवा टेकविन ने शुक्रवार को एक करार पर दस्तखत किए। सेना और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से इसे पहले ही अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। हाल फिलहाल में तोप के लिए यह दूसरा बड़ा सौदा है। 1986 में बोफोर्स तोपों की खरीद के बाद भारत ने पिछले साल पहली बार अमेरिकी कंपनी बीएई सिस्टम्स के साथ 145 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर तोपों के लिए सौदा किया था।

यह भी जानिए 

  • वज्र की खरीद की प्रक्रिया 2011 में शुरू हुई
  • फिलहाल सौदा 4,600 करोड़ रुपये में 100 तोपों के लिए हुआ
  • इसकी संख्या आगे चलकर बढ़ाई जा सकती है
  • 18 महीनों में डिलीवरी शुरू होगी और 42 महीनों में पूरी होगी
  • पुणे के निकट तालेगांव में पहले 10 तोपों का निर्माण किया जाएगा
  • एलएंडटी गुजरात के हजीरा में भी प्लांट बना रही है, जहां वज्र का निर्माण किया जाएगा।

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