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कुलभूषण मामले से शहीद के पिता की उम्मीदें हुईं ज़िंदा

पालमपुर। पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव को सैनिक अदालत की तरफ से सुनाई गई मौत की सजा के मामले ने शहीद कैप्टन (तब लेफ्टिनेंट) सौरभ कालिया के परिवार के जख्म फिर हरे कर डाले। वहीं जाधव का मामला अंतर्राष्ट्रीय अदालत में पहुंचा तो इस परिवार को हल्की सी उम्मीद दिखाई दी है। उम्मीद उस इंसाफ की जिसका इंतजार करते करते सौरभ के पिता एन. के. कालिया और परिवार के सदस्यों को 18 साल हो गए।





  • बड़े ही दुखी मन से एन. के. कालिया कहते हैं कि इतने लंबे अरसे में सरकारें बदल गर्इं लेकिन उनकी मांग पर सरकारों का रवैया नहीं बदला।

23 बरस का सौरभ देश पर मर मिटने के जज्बे के साथ भारतीय सेना में भर्ती हुआ था लेकिन वह और उसके साथ शहीद हुए पांच जवान कम से कम ऐसी बर्बरता के लायक तो नहीं थे, जो पाकिस्तानियों ने उनके साथ की। वह 15 मई 1999 का दिन (करगिल संघर्ष की पहली घटना का दिन) था जब 4 जाट रेजिमेंट का लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया अपने देश की बजरंग पोस्ट को दुश्मन से छुड़ाने की कोशिश में जुट गया था जिसे घुसपैठियों (पाकिस्तान सेना) ने कब्जा लिया था। असलाह खत्म होने तक सौरभ और पांच जवान अर्जुन राम, भंवरलाल, मीका राम, मूलाराम, और नरेश सिंह संघर्ष करते रहे लेकिन इससे पहले कि मदद को और साथी पहुंच पाते, दुश्मन ने उन्हें पकड़ कर कैद कर लिया।

शहीद लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया

शहीद लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया

बाइस दिन बाद जब पाकिस्तान ने सैनिकों के पार्थिव शरीर लौटाए तो समझ आया कि वो वहशी दरिंदों की कैद में तड़प तड़प कर शहीद हुए होंगे। दुश्मन ने उन्हें पकड़ने के बाद युद्धबंदियों के लिए तय अंतर्राष्ट्रीय नियम तो तोड़े ही, इंसानियत तक को शर्मशार और तार-तार कर डाला। शवों की हालत ऐसी थी कि कठोर से कठोर दिल वाला इंसान भी उन्हें देखकर रो पड़े या गश खाकर गिर जाए।

सौरभ के पोस्टमार्टम के बाद तैयार रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेज जो कहानी बयान करते हैं वे परिवार तो क्या अनजान इंसान के मन में भी उन दरिंदों के प्रति घृणा पैदा कर दे। सौरभ के जिस्म पर सिगरेट से जलाए जाने के निशान मिले, कई हड्डियां और दांत टूटे हुए थे। इससे भी ज्यादा ऐसा वहशीपन कि इसे बताने या लिखने के लिए शब्द भी छोटे पड़ जाएं। सौरभ के कानों में गर्म सलाखें डाली गर्इ थीं, आंखें निकाल ली गर्इ थीं और ऐसा करने से पहले उनमें भी सुराख किए गए, हाथ पैर काटे गए। इतना ही नहीं संवेदनशील अंग काटकर अलग कर दिए गए और फिर गोली मारी गई थी।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि जवान बेटे की इस हालत को देखकर किसी भी पिता पर क्या बीतेगी। बेटे ने दरिंदगी के हालात में जो दर्द सहा होगा, इसकी कल्पना करना भी इस पिता में खौफ और घृणा भर देता है। लेकिन इन्होंने भी ठान रखी है कि बेटे और उनके साथ गए जवानों के साथ ये करतूत करने वालों, इसके लिए जिम्मेदार दानवों को दुनिया की सबसे बड़ी अदालत के कटघरे में खड़ा करना है।

शहीद लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया

शहीद लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया अपने घर में बेटे की ट्राफियों और अवार्ड में खोए हुए

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में रहने वाले श्री कालिया का कहना है कि 1999 में प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और विदेशमंत्री तक ने कहा था कि सौरभ के मुजरिमों को सजा दिलाई जाएगी। तब एनडीए की सरकार थी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। इसके बाद दो बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारें आईं। अब फिर भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकार को आए तीन साल हो गए लेकिन सौरभ के मुजरिम अब तक सामने नहीं लाए जा सके। भारत में इंसाफ के लिए मौजूद हर दरवाजा श्री कालिया खटखटा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट तक भी गए लेकिन पाकिस्तानी सेना की करतूत अब तक अंतर्राष्ट्रीय अदालत के सामने सरकार नहीं रख पाई।

  • एन. के. कालिया कहते हैं- ‘मुझे तो सरकार ने तब तक सही हालात और तमाम पहलू तक नहीं बताए थे जब तक मैंने आरटीआई दाखिल नहीं की और सुप्रीम कोर्ट में याचिका नहीं डाली।’

श्री कालिया सेना के जज्बे को सलाम करते हैं और आज के हालात का जिक्र करते हुए कहते हैं कि सेना जैसे कार्य कर रही है वो शाबाशी के लायक है लेकिन ये कहते-कहते उनका गला भर जाता है और आंखें शून्य में कुछ तलाशती दिखाई देती हैं। अचानक कहते हैं- ‘जब सैनिक देश के लिए शहीद होता है तो परिवार के लिए, सेना के लिए, देश के लिए गर्व की बात होती है लेकिन पाकिस्तान ने जो कुछ सौरभ के साथ और उसके साथियों के साथ किया वह बेहद शर्मनाक-दुखदायी है… पेरेंट्स के लिए भी, आर्मी के लिए भी और देश के लिए भी।’

श्री कालिया ने फिर मांग की है कि ये मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय और विदेश मंत्रालय को खुद उठाना चाहिए। कुलभूषण जाधव मामले का हवाला देते हुए श्री कालिया बोले- ‘जो घटनाचक्र हो रहा है और जैसे ये केस इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस (ICJ) में उठाया गया है वैसे ही सौरभ, उसके साथी पांच जवानों और हमारे सैनिकों के सिर काटे जाने (कुछ अरसा पहले के मामले) और उनके जिस्म से बर्बरता के केस भी ICJ में उठाया जाए तो हम पाकिस्तान को सबक सिखा सकते हैं।’

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