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अजब हंगपन ‘दादा’ की गजब कहानी, अकेले ही आतंकियों पर पड़ गए भारी

पोजिशन लिए हुए दादा को एक आतंकी बिल्कुल सामने दिखाई दिया जिसे उन्होंने पलभर में ढेर कर दिया। इस बीच बाकी साथी दादा को कवरिंग फायर देते रहे। दादा आगे बढ़ते गए। दादा ने अपने साथियों को दूर से ही कवर फायर करने को कहा था।

साबू पोस्ट…!
हां…!
दादा! अभी चार आतंकियों की हरकत दिखी है मीरा नार से साबू की तरफ, आपको इन्हें रोकना है….!





26 मई 2016 को सुबह 6 बजे ये निर्देश कुपवाड़ा के नौगाम सेक्टर में स्थित साबू पोस्ट पर तैनात हवलदार हंगपन ‘दादा’ को मिला। दादा आतंकियों को रोकने के लिए अपनी टुकड़ी के साथ निकल पड़ते हैं। इस बीच 4 आतंकी साबू पोस्ट और मर्सरी पोस्ट के बीच उन्हें दिखाई पड़े। दादा ने अपनी टुकड़ी के साथ बर्फीले इलाके में 13000 फुट का फासला इतनी तेजी से तय किया कि आतंकवादियों के निकल भागने का रास्ता नहीं बचा।

घायल दादा ने बिना हथियार के ही आतंकी का काम तमाम कर दिया :

सबसे पहले इन्हें आतंकियों के करीब पहुंचना था। इस दौरान मीडियम मशीन गन (एमएमजी) से जवान फायरिंग करते रहे। जवानों की गोलीबारी से बचने के लिए दो आतंकी तुरंत पीछे की तरफ भागे। दादा अपनी टुकड़ी से करीब 350 मीटर आगे थे। आतंकवादियों की तरफ से हो रही भारी फायरिंग की वजह से दादा की टुकड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही थी। दादा अकेले ही आतंकियों से लोहा लेने निकल पड़े। वो रेंगते हुए पत्थरों की आड़ में छिपकर आतंकियों के करीब पहुंच गए। इस बीच उनके साथी उन्हें कवर फायर देते रहे।

“The Warriors Spirit"

"National Hero in Life and Death" – Havildar Hangpan Dada, Ashok Chakra(Posthumous), Assam Regiment. This movie titled – " The Warriors Spirit" is a tribute to this #BraveSonOfIndia .Hav Hangpan Dada was born on 02 Oct 1979 in village Borduria, near Khonsa in District Tirap of Arunachal Pradesh. Hav Dada was from 4 ASSAM REGIMENT. He was always known as a soft spoken, god fearing gentleman with resolute will, daring courage and sharp soldierly skills to his friends. Driven by his deep calling for adventure and challenging operational life, he volunteered to serve in Rashtriya Rifles. While deployed in High Altitude Area on a post, he in a hand to hand combat with total disregard to personal safety, singlehandedly eliminated three terrorists. Undeterred by the grave injury he sustained while doing so, he still chose to continue and was instrumental in eliminating the fourth terrorist trying to infiltrate . In the process he laid down his life in the highest traditions of #IndianArmy. For his conspicuous act of bravery and raw courage, he was awarded with ASHOK CHAKRA (POSTHUMOUS). This movie is dedicated to this immortal Hero Hav Hangpan Dada, Ashok Chakra of 4 ASSAM REGIMENT.

Posted by ADGPI – Indian Army on Wednesday, January 25, 2017

पोजीशन लिए हुए दादा को एक आतंकी बिल्कुल सामने दिखाई दिया जिसे उन्होंने पलभर में ढेर कर दिया। इस बीच बाकी साथी दादा को कवरिंग फायर देते रहे। दादा आगे बढ़ते गए। दादा ने अपने साथियों को दूर से ही कवर फायर करने को कहा था। लिहाजा बाकी आतंकी जवानों की गोलीबारी में उलझे रहे।

इस बीच पत्थरों के सहारे दादा ने पोजीशन ली और दूसरे आतंकी को भी मार गिराया। तभी एक आतंकी ने उन पर फायरिंग की और दादा जख्मी होकर गिर गए लेकिन फिर भी दादा मुकाबले के लिए खड़े हुए हालांकि, हथियार छूट गया था। आतंकी मौका देखकर भागना चाहा लेकिन दादा ने उसे दबोच लिया और बिना हथियार के ही आतंकी का काम तमाम कर दिया। इस बीच चौथे आतंकवादी को भी उनके साथियों ने मार गिराया।

मरणोपरांत अशोक चक्र:

  • दादा को 68वें गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दादा की पत्नी चासेन लोवांग को अशोक चक्र दिया।

  • अशोक चक्र परमवीर चक्र के समकक्ष का सम्मान है। अशोक चक्र शांति काल में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।

हंगपन दादा पत्नी चासेन लोवांग के साथ।

कैसे पहुंचे फौज में:

  • दादा का जन्म 2 अक्टूबर 1979 को अरुणाचल प्रदेश के बोदुरिया गांव में हुआ था। दादा बहुत ही खुशमिजाज और दूसरों की मदद करने वालों में से थे।

  • दादा 1997 में 18 वर्ष की उम्र में असम रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। बाद में 35 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किए गए। वह पिछले साल हाई माउंटेन रेंज में तैनात थे। बचपन से ही उन्हें फौज में जाना पसंद था।

दादा के नाम पर स्मारक :

हवलदार हंगपन अपनी टुकड़ी में ‘दादा’ के नाम से मशहूर थे। शिलांग के असम रेजीमेंटल सेंटर (एआरसी) में एक एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक को भी उनका नाम दिया गया है।

दादा को अंतिम विदाई देने उमड़ा जन सैलाब।

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