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करगिल विजय विशेष: जानें परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बत्रा से जुड़ी कुछ अहम बातें

13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में बतौर लेफ्टिनेंट हुए नियुक्त





कैप्टन विक्रम बत्रा

 

स्नातक के बाद विक्रम ने सीडीएस परीक्षा पास कर जुलाई 1996 में भारतीय सेना अकादमी ज्वाइन कर ली। इंडियन मिलिट्री अकादमी से पास आउट होने के बाद, दिसम्बर 1997 में उन्होंने 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशन्ड किए गए। अपनी सैन्य क्षमताओं को और निखारने के लिए उन्होंने सन 1999 में कमांडो का प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान करगिल में पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ कर भारत की सरज़मीन पर कब्ज़ा जमा लिया। और भारतीय सेना घुसपैठियों को खदेड़ने और अपनी चोटियों को वापस पाने में जुट गई। 1 जून, 1999 को विक्रम को उनकी टुकड़ी के साथ करगिल युद्ध में भेज दिया गया। हम्प और राकी नाम की जगह को जीतने के बाद उसी समय विक्रम को प्रमोशन देकर कैप्टन बना दिया गया।…इसके बाद शुरू हुई कैप्टन विक्रम बत्रा की वो परीक्षा जिसने दुनिया को उनके साहस और जज्बे से वाकिफ कराया। सबसे महत्वपूर्ण चोटियों में से एक 5140 छोटी पर पाकिस्तानी सेना ने कब्ज़ा कर श्रीनगर-लेह मार्ग को निशाना बनाया हुआ था, तब कैप्टन बत्रा को इस छोटी को पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराने का ज़िम्मा सौपा गया।

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