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करगिल विजय विशेष: जानें परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बत्रा से जुड़ी कुछ अहम बातें

अदम्य साहस, अनुकरणीय वीरता और जांबाजी की दूसरी मिसाल कैप्टन विक्रम बत्रा ने करगिल युद्ध में कर्तव्यपालन के दौरान जिस समर्पण, निष्ठा के साथ शहादत को गले लगाया उनका 09 सितंबर को जन्मदिन था। करगिल युद्ध में सैकड़ों भारतीय सैनिकों ने  देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे थी। भारतीय सैनिकों ने दुश्मनों को चट्टानी हौसलों से मसल कर रख दिया। जवानों ने दुश्मन के दांत खट्टे कर उसके पैर तो भारतीय ज़मीन से उखाड़ दिए मगर कई भारतीय वीर शहादत का जाम पी कर अमर हो गए।…उन्हीं शेरों में एक ऐसा भी था जिसका कोड नाम ही ‘शेरशाह’ था, और वो थे कैप्टन विक्रम बत्रा।





पालमपुर में हुआ कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म

कैप्टन-विक्रम-बत्रा

 

कैप्टन विक्रम की प्रारंभिक शिक्षा पालमपुर में ही हुई और उन्होंने स्नातक (विज्ञान) डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से किया। बचपन से ही सेना में रुचि और देशसेवा के जज्बे के साथ कैप्टन बत्रा एक बेहतरीन NCC कैडेट भी रहे। विक्रम को हांगकांग में मर्चेंट नेवी में भारी वेतन पर नौकरी करने का मौका मिला मगर उन्होंने ठुकराते हुए भारतीय सेना में शामिल होने का ठाना।

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