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कानपुर में भू-माफियाओं ने किया नेताओं और पुलिसकर्मियों के संरक्षण में सेना की जमीन पर अवैध कब्जा

सेना की जमीन पर अवैध कब्जा

कानपुर। यूं तो औद्योगिक नगर कानपुर में भू-माफिया द्वारा सरकारी, गैर-सरकारी जमीन पर कब्जा करने की घटनाएं अक्सर ही अखबार की सुर्खियां बनती रहती हैं लेकिन शहर एवं कैंट में सेना की जमीन पर भी अवैध कब्जा करने से कानपुर का भू-माफिया बाज नहीं आया।





खबर के मुताबिक भू-माफिया ने बहुत सी खाली पड़ी भारतीय सेना की जमीन को फर्जी सोसायटी बनाकर बेच दी थी।भारतीय सेना अब अपने सभी ज़मीन को मुक्त कराने के लिए प्रयासरत हैं। जब 17 मई को अपने ए-वन भूमि के सीमांकन के लिए लोहे के पिलर गाड़ने पहुंची तब मामला और हैरतअंगेज हुआ। बता दें कि बाजार में जमीन की कीमत 500 करोड़ से भी ज्यादा है।

यह मामला शहर के किदवई नगर इलाके का है। बीते शुक्रवार को ए-वन लैंड (सेना की जमीन) खोज रही सेना ने क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की। सेना ने किदवई नगर बाई पास से उदयपुर इलाके तक जगह-जगह तारबंदी के लिए लोहे के पिलर गड़वाए। बता दें कि सेना की इस कब्जाई जमीन(लगभग 6.5 एकड़) पर सालाना लाखों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने वाले वृंदावन गेस्ट हाउस, लॉर्ड्स व शारदा लॉन शामिल हैं। इनके मालिको को एक स्थानीय बड़े नेता का संरक्षण प्राप्त है। श्याम नगर चंदारी स्थित सेना की जमीन, जिसका इस्तेमाल सेना के टैंक को युद्ध/ट्रेनिंग में लाने-लेजाने के पिछले 50 वर्ष से किया जा रहा है, उस पर भी गैरकानूनी कब्जा के मामले में भी पिछले महीने इसी नेता के द्वारा संरक्षण का मामला प्रकाश में आया था।

कार्रवाई के दौरान भारतीय सेना की जमीन पर काबिज़ कई परिवारों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से यहां पर रह रहे हैं। 29 साल पहले लोगों ने यह जमीन रणधीर सिंह व बब्बू सिंह से सोसायटी के माध्यम से खरीदी दी।

सूत्रों के अनुसार इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस की भूमिका भी बहुत संतोषजनक नहीं रही। पुलिस के लोगों ने भू-माफिया के निशाने पर सेना के कार्य में दखल देने का प्रयास भी किया। सेना के अधिकरियों ने बताया कि सेना की कारवाई रोकने के लिए नौबस्ता पुलिस थाने ने सेना के कुछ जवानों और ऑफिसर के खिलाफ केस भी दर्ज किया है।

सेना के सूत्रों का कहना है कि सेना की ए-वन लैंड पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। इन सभी को पहले ही PPE Act 1971 के तहत नोटिस दिया गया था। जमीन के संबंध में दस्तावेज दिखाने को भी कहा गया था लेकिन इनमें से कोई भी आगे नहीं आया। इनके खिलाफ पीपी एक्ट के तरह कार्रवाई की जा रही है।

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