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भारत-बांग्लादेश सेनाओं का संयुक्त साइकिलिंग अभियान

भारतीय और बांग्लादेश सेनाओं के संयुक्त साइकिल चालन अभियान

अगरतला। भारत और बांग्लादेश की सेनाओं के एक संयुक्त साइकिलिंग अभियान को लेफ्टिनेंट जनरल एएस बेदी (जीओसी गजराज कॉर्प्स) ने झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान दल पूरे भारत और बांग्लादेश में भ्रमण करेगा।





यह दल अगरतला, कोमिला, ढाका और जेसौर होते हुए 12 दिनों में तकरीबन 500 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद कोलकाता पहुंचेगा। अभियान के दौरान दल 1971 में बांग्लादेश के गौरवशाली स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक युद्धस्थलों का भी दौरा करेगा। यह दल 22 मार्च को रवाना किया गया था।

भारतीय और बांग्लादेश सेनाओं के संयुक्त साइकिल चालन अभियान

भारत और बांग्लादेश की सेनाओं के एक संयुक्त साइकिलिंग अभियान को लेफ्टिनेंट जनरल एएस बेदी (जीओसी गजराज कॉर्प्स) ने झंडी दिखाकर रवाना किया।

भारत-बांग्लादेश सेना की संयुक्त साइकिल चालन टीम को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल एएस बेदी ने दोनों देशों के साझा इतिहास को रेखांकित किया और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों पर बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त साहसिक गतिविधियों की शुरूआत के परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ेगा। फ़्लैगिंग ऑफ समारोह में उत्तर पूर्व के सांस्कृतिक समूहों ने भी परफार्मेंस दी।

इससे पहले, पांच अधिकारियों और दस सैनिकों वाली बांग्लादेश सेना की अभियान टीम 19 मार्च को अगरतला पहुंची थी। उन्होंने 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति के लिए हुए युद्ध के शहीदों के सम्मान में बने मेमोरियल्स और अगरतला के पास कई विरासत स्थलों का दौरा किया था।

1971 युद्ध से जुड़ी खास बातें:

भारत-पाक युद्ध

1971 का ऐतिहासिक पल

  • भारत-पाक के बीच युद्ध 3 दिसंबर 1971 से 16 दिसंबर 1971 तक चला।
  • युद्ध का परिणाम: भारत की जीत और बांग्लादेश का निर्माण। भारतीय सेना के सामने 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था।
  • इस युद्ध में 3,900 भारतीय जवान शहीद हुए थे और लगभग 10,000 जवान घायल हुए थे।
  • 1971 की लड़ाई में सीमा सुरक्षा बल और मुक्ति वाहिनी ने पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिर भी यह एकतरफ़ा लडा़ई नहीं थी। हिली और जमालपुर सेक्टर में भारतीय सैनिकों को पाकिस्तान के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पडा।
  • मुक्ति वाहिनी ने पाकिस्तानी सैनिकों पर कई जगह घात लगाकर हमला किया और पकड़ में आने पर उन्हें भारतीय सैनिकों के हवाले कर दिया।

1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के हीरो

तत्कालीन सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ: इनके नेतृत्व में तीनों सेनाएं काम कर रही थी और मानेकशॉ ने निर्णय लेने का अधिकार कोर कमांडरों को दे रखा था। जबकि पाकिस्तान की सेना को हाईकमान से आदेश मिलने का इंतजार करना पड़ता था। मानेकशॉ ने कमांडरों को फ्री हैंड दे रखा था और यही कारण है युद्ध में भारत की जीत हुई। आश्चर्य की बात है कि पूरे युद्ध में मानेकशॉ खुलना और चटगाँव पर ही कब्ज़ा करने पर ज़ोर देते रहे और ढ़ाका पर कब्ज़ा करने का लक्ष्य भारतीय सेना के सामने रखा ही नहीं गया।

कमांडर ले. जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा: ये वह शख्स हैं जिन्होंने अपनी बहादुरी के साथ-साथ 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी चतुरता का भी परिचय दिया। इनके पास ढाका में सिर्फ 3,000 सैनिक थे जबकि पाकिस्तान के पास उस समय ढाका में 24 हजार से भी ज्यादा सैनिक मौजूद थे लेकिन इन्होंने ऐसा माहौल बनाया कि पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एके नियाज़ी (कमांडर, पूर्वी कमान) को अपने सैनिकों के साथ सरेंडर करना पड़ा। अरोड़ा ने नियाजी से कहा, मैं आपको फ़ैसला लेने के लिए तीस मिनट का समय देता हूँ। अगर आप समर्पण नहीं करते तो मैं ढाका पर बमबारी दोबारा शुरू करने का आदेश दे दूँगा।’ जबकि, हकीकत यह थी कि अरोड़ा की हालत अंदर से खराब थी क्योंकि, उस समय ढाका में पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या भारतीय सैनिकों से 8 गुना ज्यादा थी। अरोड़ा की वार्निंग रंग लाई और नियाजी को समर्पण करना पड़ा।

मेजर होशियार सिंह, लांस नायक अलबर्ट एक्का, फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों, लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, चेवांग रिनचैन और महेन्द्र नाथ मुल्ला भी भारत-पाकिस्तान 1971 वार के हीरो रहे। निर्मलजीत सेखों ने एक के बाद एक जम्मू एयरवेज पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को आसमान में ही मार गिराया हालांकि, एक पाकिस्तानी फाइटर जेट के निशाने पर वे आ गए और अपने साथी को उन्होंने मैसेज किया कि अब आप संभालिए मुझे घेरा जा चुका है और इस बीच उनका फाइटर जेट को पाकिस्तानी फाइटर जेट के हमले का शिकार हो गया।

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