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सेना की मदद को तैयार है WLR स्वाति

डीआरडीओ

नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) के बनाए तीन उत्पाद औपचारिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना में शामिल किए गए। इनमें शस्त्र का पता लगाने वाली राडार (WLR) स्वाति, परमाणु जैविक रसायन (एनबीसी) की टोह देने वाला वाहन और परमाणु जैविक रसायन (एनबीसी) दवा शामिल हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने डीआरडीओ की तरफ से ये उत्पाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को सौंपे।





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डीआरडीओ के चेयरमैन और रक्षा विभाग (R&D) के सचिव डा. एस क्रिस्टोफर और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर सेना प्रमुख को उत्पाद सौपते हुए

कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में श्री पर्रिकर ने डीआरडीओ को हाल ही में किए गए इंटरसेप्टर मिसाइल परीक्षण के लिए बधाई दी और उम्मीद जाहिर की कि निकट भविष्य में डीआरडीओ, सैन्य बल, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र की साझेदारी जबरजस्त परिवर्तन ला सकती है।

वहीं, सेना प्रमुख जनरल बिपिन सिंह रावत ने एक के बाद एक मिल रही सफलताओं के लिए डीआरडीओ को बधाई थी और उम्मीद जाहिर कि यही रफ्तार रही तो भारतीय सेना का आधुनिकीकरण बहुत तेज गति से होगा।

डीआरडीओ के चेयरमैन और रक्षा विभाग (R&D) के सचिव डा. एस क्रिस्टोफर ने कहा कि अब नौसेना और वायुसेना को ये उत्पाद देने का समय है और यह डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के लिए गर्व करने वाले क्षण हैं।
शस्त्र का पता लगाने वाली राडार (WLR) स्वाति, परमाणु जैविक रसायन (एनबीसी) की टोह देने वाला वाहन और परमाणु जैविक रसायन (एनबीसी) दवा का टेस्ट 2016 में सक्षम संस्थानों और विशेषज्ञों की तरफ से मूल्यांकन के बाद किया जा चुका है।

WLR के जरिए दुश्मन के उस ठिकाने का सटीक तरीके से पता लगाया जा सकता है जहां से मोटर्रार या रॉकेट से हमला किया जा रहा हो। इतना ही नहीं ये सिस्टम अलग-अलग जगह से किए जा रहे हमले की जगह का एक साथ पता बता सकता है। इतना ही नहीं यह जवाबी हमले में भी भरपूर मदद करता है।

NBC रेकी वाहन एमके-1 से परमाणु, जैविक और रसायनिक हमले से प्रभावित क्षेत्रों का पता लगाता है। यह प्रभावित क्षेत्रों से तरल एवं ठोस नमूने एकत्र करने के साथ-साथ उसका डाटा भी त्वरित गति से प्रेषित कर सकता है जो सामरिक तौर पर मददगार होगा।

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