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चीन सीमा पर हर मुकाबले के लिए ध्रुव-IV की तैयारी

ध्रुव-iv हेलिकाप्टर

नई दिल्ली। भारतीय सेना चीन से सटी सीमा की चौकसी बढाने और किसी भी तरह की सेंध लगने से रोकने के लिए ध्रुव-IV हेलिकाप्टर तैनात करने की तैयारी में है। फिलहाल इसकी एक स्क्वाड्रन की तैनाती सोची गई है। इसमें 10 हेलिकाप्टर होंगे। भारत-चीन सीमा पर हथियारबंद हेलिकाप्टरों की थलसेना की ये पहली तैनाती होगी।





  • हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (HAL) का बनाया ध्रुव हेलिकाप्टर एक ऐसा हेलिकाप्टर है जिसका इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है
  • ध्रुव एडवांस लाइट हेलिकाप्टर (ALH) की युद्धक क्षमता जबरदस्त है
  • इसमें 20 मिमी की घुमावदार गन तो है ही 70 मिमी वाले राकेट भी हैं
  • तकरीबन 40 करोड़ रुपये की कीमत वाले ध्रुव का वजन 5 टन है और इसके निर्माण की शुरुआत 1984 में हुई थी
  • जर्मनी के सहयोग से भारत में बने इस हेलिकाप्टर ने पहली उड़ान 1992 में भरी थी

एचएएल (HAL) ध्रुव के नाम से लोकप्रिय युद्धक क्षमता वाले इस हेलिकाप्टर को पहले ध्रुव-डब्ल्यूएसआई (WSI-weapons systems integrated) कहा जाता था। ये हवा से हवा में और हवा से जमीन पर मार करने की क्षमता टो रखता ही है, ये टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों को भी तबाह कर सकता है। समय-समय पर बदलाव के बाद ध्रुव 2002 में सेवा में लाया गया। पहले इसे इजरायल और नेपाल को भी निर्यात किया गया। भारत में सबसे पहले इसे भारतीय तटरक्षक (Indian Coastguard) ने इस्तेमाल किया था।

चूंकि ध्रुव बहुउद्देश्यीय है इसलिए अलग-अलग संगठनों में अलग-अलग काम करने के हिसाब से ये बड़ा मुफीद बैठता है। चाहे एयर एम्बुलेंस का काम हो या आपदा के वक्त राहत कार्य में जरूरत हो, निचली उड़ान भरते हुए चौकसी रखनी हो या पर्वतीय क्षेत्रों में निगरानी रखनी हो, HAL DHRUV सब तरह से आजमाया जा चुका है। वैसे इसके दो तरह के वेरिएन्ट्स हैं। सैन्य संगठनों के इस्तेमाल के लिए तो यह है ही, गैर सैन्य या कामर्शियल इस्तेमाल के लिए भी है।

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