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बाढ़-बर्फबारी से बेहाल कश्मीरियों के लिए फिर ‘रक्षक’ बनी सेना

कश्मीर में बाढ़

श्रीनगर: अलगवावादी और पत्थरबाज बेशक भारतीय सेना को अपना दुश्मन समझते हों लेकिन जब कोई आपदा आती है तो उनकी मदद सिर्फ सेना ही करने पहुंचती है। एक बार फिर से सेना ने राज्य में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न होने पर आज कई लोगों को बचाया। जवानों ने बच्चों को निकालकर उनके परिवार के हवाले किया या सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। घाटी के स्कूल-कालेज सोमवार तक के लिए बंद कर दिए गए हैं।





जम्मू कश्मीर में पिछले तीन दिन से जारी लगातार बर्फबारी और बारिश के कारण कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे बारामुला जिले के कृपालपुर पेन, पट्टन में बाढ़ आ गई। बाढ़ में फंसे दर्जनों लोगों को भारतीय सेना के 55 आरआर के जवानों ने सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। दरअसल, जंगम क्षेत्र की सेना की कंपनी ऑपरेटिंग बेस को यहां बाढ़ में फंसे लोगों से जुड़ी सूचना कॉल पर मिली। उन्हें बताया गया कि यहां स्थित नाले में पानी पुलिया से ऊपर बह रहा है और यहां बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न होने की संभावना है। मामले की जानकारी मिलते ही सेना के 51 आरआर के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया।

जम्मू-कश्मीर में बाढ़

नाव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाते सेना के जवान

दूसरी तरफ श्रीनगर के बेमिना इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने के बाद इमाम हुसैन अस्पताल में खतरनाक हालात पैदा हो गए। अस्पताल के निचले हिस्से में पानी भर गया और वहां मरीज भी फंसे हुए थे। ऐसे में वहां पहुंचे सेना के जवानों ने तुरत-फुरत कार्रवाई शुरू की। एक तरफ मरीजों को अस्पताल से बाहर निकालने का सिलसिला शुरू किया गया तो दूसरी तरफ पानी से भरी बिल्डिंग की व्यवस्था ठीक करने में जुट गए। इसके तहत सबसे पहले पानी निकालना शुरू किया गया जो एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने फायर ब्रिगेड का भारी-भरकम पम्प कुछ इस तरीके से फिट करके चालू किया कि पानी सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा सके।

जम्मू कश्मीर

सड़कों पर जलजमाव से ये स्थिति कश्मीर की है

कुछ जगहों पर ऐसे हालात हो गए कि वहां पर सेना को नाव का सहारा लेना पड़ा। गलियों, घरों, रास्तों में सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा था। जवान राहत और बचाव कार्य के लिए नाव लेकर लोगों को बचाने के लिए गलियों में घूम रहे थे। जिधर भी उन्हें किसी के होने की जानकारी मिलती वह तुरंत वहां पहुंचते और उसे बचाकर ले आते। इस दौरान जवान कुछ लोगों को गोद में भी उठाकर लाते दिखे।

सेना के जवान सड़क बचाने और पानी की दिशा मोड़ने के लिए रेत-पत्थर भरे बोरियों से घेरा बनाते हुए

कुछ जगहों पर सेना के जवानों ने सड़कों को बाढ़ से बहने से रोकने के लिए रेत-पत्थरों से भरी बोरियों का सहारा लिया। जवानों ने पानी की दिशा बदलने के लिए जगह-जगह अवरोधक लगाए और पानी की दिशा बदली ताकि सड़क आदि न बहे।

बारिश व बर्फबारी के कारण बाढ़ से लोग घरों में कैद से हो गए हैं।

राज्य के दक्षिण कश्मीर में संगम, श्रीनगर में राम मुंशीबाग तथा उत्तरी कश्मीर में असहाम खतरे के निशान से थोड़ी नीचे ही बह रही हैं। वहीं उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में फिरोजपुर धारा बदलकर कुछ गांवों के भीतर चली गई है। इन स्थानों पर राहत तथा बचाव की टीमें पहुंचकर अपना कार्य करने में जुटी हैं। इसी बीच भारी बारिश के कारण जामा मस्जिद का एक हिस्सा भी पानी में बह गया है।

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