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भारतीय सेना के पास अब ‘दिव्यचक्षु’, बच नहीं पाएंगे आतंकवादी

'दिव्यचक्षु' रडार

नई दिल्ली। अब भारतीय सेना दीवार के पीछे या बंकर की आड़ में छिपे आतंकी को भी आसानी से देख सकेगी और वह भी कम से कम जोखिम उठाए। इतना ही नहीं, आतंकी को ढेर करना है या उसे कब्जे में लिया जा सकता है इस पर तुरंत फैसला लेना भी संभव होगा।





सेना के लिए ये काम करेगा एक ख़ास रडार जिसका नाम है ‘दिव्यचक्षु’ (Divyachakshu)। यह एक ऐसी रडार प्रणाली है जो लघु विद्युत चुम्बकीय तरंगों (Short Electromagnetic Waves) पर काम करती है। ये तरंगें 25 से 30 सेंटीमीटर (10 से 12 इंच) मोटी दीवार के पीछे किसी भी प्राणी की हरकत होने पर उसके पूरे हालात से वाकिफ करा देती है। उस प्राणी का आकार और यहाँ तक कि उसकी सांस की गति को भी ये तकनीक पढ़कर बता देती है।

सेना को ये तकनीक रिहायशी, संकरी गलियों वाले सघन इलाकों में ज्यादा मददगार लगती है जहां मकान एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं और आतंकवादी वहाँ ऐसी जगह छिप जाते हैं कि पता ही नहीं चलता। ऐसे इलाकों में आतंकरोधी आपरेशन में आम नागरिकों को गोली लगने का खतरा बना रहता है। ‘दिव्यचक्षु’ से आतंकी के छिपे होने की सटीक जगह की जानकारी मिल सकेगी।

कभी -कभी ऐसा भी होता है कि किसी घर में तलाशी लेने के बाद भी आतंकी को खोजा नहीं जा सकता। बुरहान वानी के मामले में भी ऐसा ही हुआ था। उसकी तलाश में सुरक्षा बल उसके छिपे ठिकाने को पूरी तरह छानकर गए लेकिन वह दिखाई नहीं दिया। बाद में पता चला कि वह फाल्स सीलिंग में छिपा हुआ था।

फिलहाल ये रडार प्रणाली आयात की गई है लेकिन इसे भारत में ही बनाए जाने पर भी काम हो रहा है। DRDO ने ये प्रोजेक्ट बना लिया है लेकिन अभी ट्रायल के स्तर तक नहीं पहुंचा।

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